बक्सर की धरती से उठी लेखनी की बुलंद आवाज: वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ भरत मिश्र प्राची का प्रेरक जीवन परिचय
गंगा तट की पावन भूमि से निकलकर राजस्थान तक चमका नाम, 35 वर्षों की पत्रकारिता और समृद्ध साहित्य सृजन से बनाई विशिष्ट पहचान


न्यूज़ विज़न। बक्सर
बिहार के ऐतिहासिक जिले बक्सर की पावन धरती, जहां महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि रही है, उसी क्षेत्र के बड़कागांव मानसिंह पट्टी में 12 जुलाई 1953 को जन्मे डॉ भरत मिश्र प्राची आज पत्रकारिता और साहित्य जगत के एक सशक्त स्तंभ के रूप में स्थापित हैं। उनकी जन्मभूमि भले ही बिहार रही, लेकिन उनकी कर्मस्थली राजस्थान बनी, जहां उन्होंने अपने लेखन और पत्रकारिता से अमिट छाप छोड़ी।
पत्रकारिता में 35 वर्षों का स्वर्णिम सफर
डॉ प्राची ने अपने 35 वर्षों के लंबे पत्रकारिता जीवन में देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों—दैनिक हिंदुस्तान, आज, नव ज्योति, जागरण, राजस्थान पत्रिका, पंजाब केसरी, भास्कर और अमर उजाला—में 5000 से अधिक समसामयिक संपादकीय लेख प्रकाशित किए। उनकी लेखनी सामाजिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर पैनी दृष्टि रखती है। साथ ही, वे पिछले 35 वर्षों से “कंचन लता” पत्रिका का संपादन कर साहित्यिक चेतना को निरंतर दिशा दे रहे हैं।
साहित्य सृजन: विविध विधाओं में योगदान
डॉ भरत मिश्र प्राची ने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है—
निबंध संग्रह (8 पुस्तकें)
सत्ता संघर्ष (2004)
शून्य काल (2006)
गुलामी की ओर बढ़ते कदम (2007)
लाभ तंत्र (2010)
सत्ता मुद्दा और राजनीति (2013)
पैसा बोलता है (2014)
लोकतंत्र के राजा बाबू (2015)
कोरोना और जिंदगी (2021)
उपन्यास (3 पुस्तकें)
अधूरी प्यास
भोर की तलाश (2004)
मोहभंग (2008)
कहानी एवं कविता संग्रह
संस्कार (कहानी संग्रह सहित अन्य कृतियाँ)
उनके साहित्य पर शोध कार्य भी किया गया है, जो उनके लेखन की गहराई और प्रभाव को दर्शाता है।
सम्मान और उपलब्धियां
डॉ प्राची को देश की अनेक प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। प्रमुख सम्मान—
शांति साधना सम्मान
पत्रकार शिरोमणि
आचार्य महावीर प्रसाद सम्मान
हजारी प्रसाद सम्मान
राजस्थान रत्न
साहित्य शिरोमणि
उन्हें विभिन्न उच्च पदस्थ हस्तियों द्वारा सम्मानित किया गया, जिनमें प्रमुख हैं—
पूर्व राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी, दिनेश नंदन सहाय, कवलराज मिश्र तथा शिक्षा मंत्री सत्यनारायण शर्मा।
विशेष पहचान
वर्ष 2001 से राजस्थान सरकार के मान्यता प्राप्त अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार, देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ भी कार्य करने का अवसर, साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक चेतना को दिशा देने वाले व्यक्तित्व।





