मृत्यु के बाद भी कई जिंदगियों को रोशन कर सकता है देहदान, बक्सर में जागरूकता सम्मेलन में उठी महादान की अलख
दधीची देहदान समिति के क्षेत्रीय सम्मेलन में अंगदान और नेत्रदान को बताया मानवता की सबसे बड़ी सेवा, 200 लोगों ने लिया देहदान-अंगदान का संकल्प


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहर के गोलंबर स्थित ईस्टर्न ग्रेस होटल के सभागार में दधीची देहदान समिति के तत्वावधान में क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य समाज में अंगदान, नेत्रदान और देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को मानव सेवा के इस महादान के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति की प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिला अध्यक्ष मीना सिंह ने की, जबकि संचालन आशा पर्यावरण सुरक्षा के राज्य संयोजक सह शिक्षक विपिन कुमार ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत सुशील मोदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि एवं दधीची देहदान समिति के प्रदेश अध्यक्ष तथा सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि मानवता को जीवित रखने का सबसे बड़ा माध्यम अंगदान और देहदान है। उन्होंने लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान और अंगदान का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि जीवात्मा के शरीर छोड़ने के बाद शरीर का कोई महत्व नहीं रह जाता, ऐसे में उसके अंग किसी जरूरतमंद के जीवन में नई रोशनी और नई उम्मीद बन सकते हैं।
पद्मश्री विमल कुमार ने कहा कि बिहार में अभी तक आईजीआईएमएस को मात्र 21, दरभंगा मेडिकल कॉलेज को दो और पीएमसीएच को केवल एक देह रिसर्च के लिए प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि यदि समाज देहदान के प्रति जागरूक नहीं होगा तो मेडिकल शिक्षा और शोध प्रभावित होंगे। एक देहदान से अनेक डॉक्टरों को प्रशिक्षण मिलता है, जो आगे चलकर हजारों मरीजों का जीवन बचाते हैं। समिति की जिला अध्यक्ष मीना सिंह ने बताया कि वर्ष 2019 में बक्सर जिला समिति का गठन हुआ था और तब से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अब तक जिले में दो देहदान सफलतापूर्वक हो चुके हैं तथा लगभग 200 लोगों ने अंगदान एवं देहदान का संकल्प लिया है। सम्मेलन में इन सभी संकल्प पत्रों को सामूहिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा गया। देहदान के माध्यम से मानवता की मिसाल कायम करने वाले स्वर्गीय रामछबीला सिंह के भतीजे सुजीत सिंह को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
डॉ. सुभाष कुमार ने नेत्रदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में कॉर्निया की भारी कमी है और इसका कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है। ऐसे में एक व्यक्ति का नेत्रदान कई नेत्रहीनों के जीवन में उजाला ला सकता है। उन्होंने सभी लोगों से परिवार सहित इस विषय पर जागरूक होने और नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की। सम्मेलन में राजकुमार सिंह, नीलम श्रीवास्तव, अनु कुशवाहा, बबन सिंह, नागेंद्र प्रसाद, अनीता यादव, दीपक अग्रवाल, राजेश केशरी, मनोज वर्मा, डॉ. श्रवण तिवारी, डॉ. रश्मि रानी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि देहदान, अंगदान और नेत्रदान केवल दान नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। एक व्यक्ति का यह संकल्प कई जिंदगियों में नई उम्मीद, नई रोशनी और नया जीवन दे सकता है।
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