भगत सिंह जयंती पर बक्सर में मार्च, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों से गूंजा भगत सिंह चौक, SIR और मतदाता सूची को लेकर उठाए सवाल


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहीदे-ए-आजम भगत सिंह की जयंती के अवसर पर रविवार को बक्सर के शहीदे-ए-आजम भगत सिंह चौक पर आइसा (AISA), आरवाईए (RYA) और भाकपा माले से जुड़े कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान “वोट चोर, गद्दी छोड़!”, “इंकलाब जिंदाबाद!” और “लोकतंत्र जिंदाबाद!” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
मार्च में बड़ी संख्या में शामिल कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है। ऐसे में उसकी कार्यप्रणाली और निर्णयों को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट, सार्वजनिक और तथ्यात्मक जवाब सामने आना चाहिए।
SIR को लेकर उठाए सवाल
मार्च के दौरान नेताओं ने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर भी सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि बिहार में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और दस्तावेजों की मांग को लेकर राजनीतिक एवं सार्वजनिक बहस हुई है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मतदाता सूची में हुए बदलाव से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को यह स्पष्ट रूप से पता चल सके कि किन आधारों पर नाम जोड़े या हटाए गए। वक्ताओं ने सितंबर 2026 में प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने कई मौकों पर आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। नए मतदाताओं के लिए Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का जिक्र रिपोर्ट में किया गया था। नेताओं ने स्पष्ट किया कि ये प्रकाशित रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियां हैं, इन्हें किसी न्यायिक निर्णय का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। नेताओं ने यह भी कहा कि 2025 में CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर यह कहा गया था कि इनमें स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, मृत व्यक्ति और विदेशी नागरिक शामिल थे।
‘हर सवाल का सार्वजनिक जवाब क्यों नहीं?’
मार्च को संबोधित करते हुए आइसा और आरवाईए नेताओं ने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो उससे जुड़े प्रत्येक सवाल का जवाब सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए। उन्होंने पूछा कि मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठ रही आपत्तियों पर पूरी जानकारी जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही है और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठने पर जवाबदेही किसकी होगी। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सबसे ताकतवर कुर्सी नहीं, बल्कि जनता का वोट होना चाहिए। वोट किसी नेता की जागीर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक मतदाता के अधिकारों की रक्षा हो और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता का भरोसा कायम रहे।
भगत सिंह के विचारों को याद करने का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने भगत सिंह की जयंती को केवल माल्यार्पण तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि भगत सिंह की विचारधारा की विरासत अन्याय, शोषण और जनविरोधी व्यवस्था के खिलाफ सवाल उठाने तथा जनता के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने में है। वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह के विचारों से प्रेरणा लेते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में शामिल कार्यकर्ताओं ने भगत सिंह के रास्ते पर चलने और जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाने का फैसला लिया।
ये रहे प्रमुख रूप से शामिल
कार्यक्रम में आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, अभिषेक मौर्या, अजीत कुमार, श्रीयांश, उमेश, आदित्य कुमार, अंशु कुशवाहा, आरवाईए जिला संयोजक राजदेव सिंह, दीपू कुमार, सुनील कुमार, कृष्णा यादव, सुनील यादव, रंजीत यादव, बब्लू यादव, भाकपा माले नगर सचिव ओम प्रकाश और प्रमोद सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे।





