जमुई की घटना के विरोध में बक्सर में आइसा का प्रतिरोध, मुख्यमंत्री का पुतला दहन
आइसा नेताओं ने सरकार से मांगा जवाब, कहा- छात्राओं की सुरक्षा केवल राजनीतिक बयान नहीं, लोकतांत्रिक अधिकार है


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जमुई में कोचिंग से लौट रहे नाबालिग छात्र-छात्रा को रास्ते में रोककर कथित तौर पर अभद्रता और छात्रा के साथ बदसलूकी की घटना के विरोध में मंगलवार को आइसा (AISA) की ओर से राज्यव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाया गया। इसी क्रम में बक्सर के बुद्ध मार्ग, आईटीआई रोड में आइसा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर सरकार से जवाबदेही की मांग की।
आइसा के जिला सचिव अखिलेश ठाकुर ने कहा कि 19 सितंबर की शाम जमुई में हुई घटना के मामले में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने कहा कि घटना को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े पूर्व सार्वजनिक दावों की कसौटी पर भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब रात 12 बजे की बात छोड़िए, शाम करीब 6-7 बजे कोचिंग से लौट रही नाबालिग छात्रा को रास्ते में रोककर उसके साथ कथित बदसलूकी होती है, तो सरकार की महिला सुरक्षा संबंधी गारंटी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आइसा नेता अंशु कुशवाहा ने कहा कि कानून-व्यवस्था का अर्थ केवल घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार को यह भी बताना होगा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत स्तर पर क्या व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों की सुरक्षा कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के सवाल को शिक्षा और रोजगार से अलग करके नहीं देखा जा सकता। बिहार में बड़ी संख्या में छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अपने घर और प्रखंड से दूर जाना पड़ता है। ऐसे में यदि स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को लेकर भय का माहौल बनेगा तो इसका सीधा असर छात्राओं की शिक्षा पर पड़ेगा। आइसा नेताओं ने नवादा के एक सरकारी विद्यालय में छात्राओं की ओर से प्रधानाध्यापक पर लगाए गए अभद्र व्यवहार के आरोपों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस मामले में पुलिस ने प्रधानाध्यापक को गिरफ्तार कर पॉक्सो समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। आइसा ने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा का सवाल केवल रात के समय सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के भीतर भी सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
अभिमन्यु कुमार ने कहा कि जमुई की घटना सहित ऐसे मामलों के खिलाफ प्रतिरोध इसलिए जरूरी है, ताकि महिलाओं की स्वतंत्रता, छात्राओं की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार जवाबदेह बने। उन्होंने मांग की कि किसी भी आरोपी को राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव के आधार पर कानून से बचने का अवसर नहीं मिलना चाहिए तथा पीड़ितों को समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए। आइसा ने मांग की कि जमुई मामले के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच पूरी की जाए, पीड़ित छात्र-छात्रा की सुरक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जाए तथा बिहार में छात्राओं एवं महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक और शैक्षणिक वातावरण की ठोस व्यवस्था की जाए। पुतला दहन कार्यक्रम में आसीम कुशवाहा, हिमांशु कुमार, चांद अली, गोलू सिंह, गणेश, श्रेयांश ठाकुर सहित आइसा के अन्य साथी मौजूद रहे।





