ईद मिलादुन्नबी पर साबित ख़िदमत फाउंडेशन में सजा रूहानी जलसा, अमन-भाईचारे का दिया संदेश
डॉ. दिलशाद आलम ने कहा—“माँ अंसारी रोटरी ब्लड बैंक” बक्सर की स्वास्थ्य सेवाओं में बनेगा मील का पत्थर, शायर साबित रोहतासवी की नात ने बांधा समां


न्यूज़ विज़न। बक्सर
ईद मिलादुन्नबी के मुबारक अवसर पर चीनी मिल, बक्सर स्थित साबित ख़िदमत फाउंडेशन एवं हॉस्पिटल परिसर में पूरी अकीदत, गरिमा और उत्साह के साथ भव्य जलसे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नात-ए-पाक से हुई, जिसके बाद पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं नूरानी माहौल में बदल गया। बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नातख्वानों तथा स्थानीय लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साबित ख़िदमत फाउंडेशन के निदेशक डॉ. दिलशाद आलम ने कहा कि रोटरी की ओर से बक्सर में स्थापित होने वाला “माँ अंसारी रोटरी ब्लड बैंक” स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक की स्थापना से जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी और यह बक्सर के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी पहल होगी। डॉ. दिलशाद आलम ने फाउंडेशन की ओर से किए जा रहे ऐतिहासिक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में सहयोग देने के लिए बक्सरवासियों के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से ही जनसेवा के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
पैगंबर हजरत मोहम्मद के संदेशों को अपनाने की अपील
ईद मिलादुन्नबी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. आलम ने महान शायर अल्लामा इक़बाल की प्रसिद्ध पंक्तियों—
“मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिंदी हैं हम, वतन है हिंदोस्ताँ हमारा।”
का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूरी मानवता को शांति, भाईचारे, दया, इंसानियत और आपसी सद्भाव का संदेश दिया। आज आवश्यकता है कि उनके बताए मार्ग पर चलते हुए समाज में अमन, मोहब्बत और भाईचारे को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि त्योहार हमें आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश देते हैं। सभी लोगों को मिल-जुलकर समाज और देश की तरक्की में योगदान देना चाहिए।
साबित रोहतासवी की नात ने बांधा समां
जलसे में हिंदुस्तान के मशहूर एवं मारूफ शायर साबित रोहतासवी ने नात-ए-शरीफ प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय एवं यादगार बना दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत नात “मेरे गौस-ए-आज़म का मुझ पर करम है” को उपस्थित लोगों ने विशेष रूप से सराहा। नात के दौरान पूरा परिसर अकीदत और आध्यात्मिक भाव से सराबोर नजर आया। इस अवसर पर डेंटल सर्जन डॉ. खालिद रज़ा, अधिवक्ता हामिद रज़ा, इंजीनियर शहीद रज़ा, बक्सर के प्रसिद्ध शायर शहरयार सहित अन्य नातख्वानों ने भी नात-ए-पाक प्रस्तुत की। वहीं हाफिज़ मारूफ ने अपनी तकरीर के माध्यम से जलसे के माहौल को पुरनूर कर दिया।
बच्चों ने भी पेश की नात-ए-शरीफ
कार्यक्रम में बच्चों की भी उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। फख्र-ए-आलम सहित अनेक बच्चों ने नात-ए-शरीफ प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों को लोगों ने खूब सराहा और उनका उत्साहवर्धन किया। जलसे के समापन अवसर पर डॉ. दिलशाद आलम ने सभी बक्सरवासियों, अतिथियों एवं कार्यक्रम में शामिल लोगों को ईद मिलादुन्नबी की दिली मुबारकबाद दी और समाज में शांति, सद्भाव, भाईचारे एवं इंसानियत की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मोहताब अली, निसार अहमद, गुलाम ख्वाजा, राहुल, नासिर, नसीम, नसरा, अमीनुल अशरफ, नबी रायजी, इंजीनियर शहीद रज़ा सहित अनेक गणमान्य नागरिक, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं साबित ख़िदमत फाउंडेशन एवं हॉस्पिटल के समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे। जलसे के माध्यम से ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर एक ओर जहां पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के शांति, प्रेम और इंसानियत के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, वहीं दूसरी ओर बक्सर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और जनकल्याणकारी पहलों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी दोहराया गया।





