ऑनलाइन जमीन का रकबा हुआ शून्य, बिना बिक्री के जमीन गायब होने का आरोप; राजपुर अंचल की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री की जमीन विवाद रोकने की कवायद के बीच बक्सर में सामने आया मामला, रैयत के पौत्र ने राजस्व व्यवस्था पर लगाए गंभीर आरोप


न्यूज़ विज़न। बक्सर/राजपुर
बिहार सरकार की ओर से जमीन विवाद और भूमि संबंधी मामलों को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी जमीन विवादों पर अंकुश लगाने और गलत तरीके से जमीन संबंधी रिकॉर्ड में बदलाव करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात कहते रहे हैं। इसके बावजूद बक्सर जिले में राजस्व रिकॉर्ड से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला राजपुर प्रखंड के परसिया गांव से जुड़ा है। गांव निवासी अमित कुमार श्रीवास्तव, पिता स्व. लक्ष्मण प्रसाद श्रीवास्तव, ने आरोप लगाया है कि उनके दादा रैयत जगन्नाथ लाल के नाम से दर्ज जमीन में उनके हिस्से का ऑनलाइन रिकॉर्ड कुछ समय पहले तक करीब 39.5 डिसमिल रकबा प्रदर्शित करता था। उनका कहना है कि इस जमीन का राजस्व लगान भी पिछले वर्ष तक नियमित रूप से जमा कर रसीद कटाई गई है। अमित कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, जब हाल में उन्होंने उक्त जमीन का ऑनलाइन रिकॉर्ड देखा तो उसमें उनके हिस्से का रकबा शून्य (0) प्रदर्शित हो रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित खाता-प्लॉट की कोई जमीन बेची ही नहीं है, फिर भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा अचानक शून्य कैसे हो गया, यह उनकी समझ से परे है।
न बिक्री की जानकारी, न अंचल कार्यालय से सूचना
शिकायतकर्ता का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जमीन का रकबा शून्य किए जाने से पहले उन्हें न तो जमीन बिक्री अथवा हस्तांतरण की कोई जानकारी मिली और न ही अंचल कार्यालय की ओर से किसी प्रकार की सूचना दी गई। उनका कहना है कि यदि जमीन की बिक्री नहीं हुई, तो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रकबा किस प्रक्रिया के तहत शून्य हुआ? यदि किसी दस्तावेज, दाखिल-खारिज या अन्य प्रक्रिया के आधार पर रिकॉर्ड में परिवर्तन किया गया है, तो उसकी जानकारी संबंधित रैयत अथवा उनके उत्तराधिकारी को क्यों नहीं दी गई?
राजस्व कर्मचारी से संपर्क, जांच का मिला आश्वासन
मामले को लेकर अमित कुमार श्रीवास्तव ने कैथहर कला के राजस्व कर्मचारी रोहित से संपर्क किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, राजस्व कर्मचारी ने मामले को देखने और जांच करने की बात कही है। हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में 39.5 डिसमिल के आसपास प्रदर्शित होने वाला रकबा अचानक शून्य किस आधार पर हुआ और इसके पीछे किस स्तर पर प्रक्रिया अपनाई गई।
निबंधन कार्यालय से लेकर अंचल कार्यालय तक उठ रहे सवाल
मामले ने जिला निबंधन कार्यालय और राजपुर अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि वास्तव में संबंधित जमीन की कोई बिक्री या हस्तांतरण नहीं हुआ है, तो फिर रिकॉर्ड में रकबा शून्य होने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
क्या किसी निबंधित दस्तावेज के आधार पर जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया? यदि हां, तो वह दस्तावेज किसके नाम और किस आधार पर तैयार हुआ? दाखिल-खारिज या जमाबंदी में संशोधन किस स्तर पर किया गया? और यदि कोई दस्तावेज ही नहीं है, तो ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा शून्य होने की वजह क्या है? इन सभी सवालों का जवाब राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मुख्यमंत्री की घोषणा पर भी उठ रहे सवाल
भूमि विवादों को रोकने और गलत तरीके से जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव करने वालों पर कार्रवाई की सरकारी कवायद के बीच इस तरह का मामला सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकार यदि जमीन संबंधी मामलों में पारदर्शिता लाने और गलत तरीके से रिकॉर्ड में परिवर्तन करने वालों पर कार्रवाई का दावा कर रही है, तो ऐसे मामलों में जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उनका सवाल है कि आखिर बिना जमीन बेचे रकबा शून्य होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कौन करेगा?
अब जांच में सामने आएगा सच
फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले में राजपुर अंचल कार्यालय, संबंधित राजस्व कर्मचारी और जिला निबंधन कार्यालय का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा शून्य होने के पीछे तकनीकी त्रुटि, रिकॉर्ड में संशोधन, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया या किसी अन्य कारण की भूमिका है। बहरहाल, एक रैयत की जमीन का रकबा बिना बिक्री के ऑनलाइन रिकॉर्ड में शून्य दिखने का आरोप कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की जांच कितनी गंभीरता से करता है और यदि रिकॉर्ड में किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।





