RELIGION

प्रह्लाद की भक्ति से गूंजा कथा पंडाल, खंभे से प्रकट हुए नरसिंह भगवान; श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु

श्री रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भक्तिमय आयोजन, ‘नंद के आनंद भयो’ के जयघोष से कृष्णमय हुआ वातावरण

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
श्री रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस भक्त प्रह्लाद की अद्भुत भक्ति, भगवान नरसिंह के प्राकट्य एवं हिरण्यकश्यप वध के साथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया गया। मामाजी के कृपापात्र आचार्य श्री रंधीर ओझा के कथा वाचन से पूरा कथा परिसर भक्तिरस में डूबा रहा। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान की महिमा का श्रवण किया।

 

कथा व्यास आचार्य श्री रंधीर ओझा ने भक्त प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप की कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि हिरण्यकश्यप अत्यंत शक्तिशाली होने के साथ-साथ अहंकारी था। वह स्वयं को भगवान मानने लगा था और चाहता था कि संसार में सभी लोग उसी की पूजा करें। इसके विपरीत उसका पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान श्रीहरि विष्णु का अनन्य भक्त था।

 

भक्ति से नहीं डिगे प्रह्लाद

कथा व्यास ने बताया कि हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से दूर करने के लिए अनेक प्रयास किए, लेकिन बालक प्रह्लाद अपने विश्वास और भक्ति से कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से भगवान पर विश्वास करने वाले भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। जब हिरण्यकश्यप ने क्रोधित होकर प्रह्लाद से पूछा कि तुम्हारा भगवान कहां है, तब प्रह्लाद ने निर्भीक होकर उत्तर दिया कि भगवान कण-कण में और हर स्थान पर विद्यमान हैं। इसके बाद भगवान श्रीहरि ने नरसिंह अवतार धारण कर खंभे से प्रकट होकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप का वध किया और अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इस प्रसंग का वर्णन सुनते ही कथा पंडाल ‘भक्त प्रह्लाद की जय’ और ‘नरसिंह भगवान की जय’ के जयघोष से गूंज उठा। कथा व्यास ने कहा कि प्रह्लाद चरित्र हमें यह संदेश देता है कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है, जबकि सच्ची भक्ति, सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्तिमय हुआ कथा परिसर

इसके बाद कथा में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जन्मोत्सव का अत्यंत मनोहारी और भावपूर्ण वर्णन किया गया। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आया, पूरा कथा स्थल भक्ति और उल्लास से भर उठा। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की कथा बड़े भाव से सुनते रहे। आचार्य श्री रंधीर ओझा ने बताया कि जब धरती पर अत्याचार बढ़ गया और अधर्म अपने चरम पर पहुंच गया, तब धर्म की स्थापना तथा भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्रीहरि ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया। मथुरा के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहां भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। भगवान के जन्म के समय कारागार का वातावरण दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वसुदेव जी उन्हें लेकर यमुना पार करते हुए गोकुल पहुंचे और नंद बाबा एवं माता यशोदा के घर भगवान को सुरक्षित पहुंचाया। श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

‘नंद के आनंद भयो’ के जयघोष से गूंजा पंडाल

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग के दौरान भजन, कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशियां मनाईं। महिला श्रद्धालु विशेष रूप से भक्ति में लीन नजर आईं और पूरा परिसर कृष्णमय हो उठा। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक अवतार की घटना नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, अन्याय पर न्याय और अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश है। भगवान अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए समय-समय पर पृथ्वी पर अवतार लेते हैं।

भव्य आरती के साथ हुआ कथा का समापन

श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर धर्म और भक्ति का लाभ प्राप्त किया। कथा के समापन पर भगवान की भव्य आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्री रामेश्वर नाथ मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।

 

 

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