RELIGION

ब्रह्माकुमारी केंद्र में अलौकिक रक्षाबंधन समारोह, कमजोरियों को परमात्मा को अर्पित करने का दिया दिव्य संदेश

रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि परमात्मा की पवित्र राखी से जीवन को सुरक्षित और संस्कारित बनाने का संदेश : ब्रह्माकुमारी रानी दीदी

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बाबानगर डिफेंस कॉलोनी स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में मंगलवार को अलौकिक एवं आध्यात्मिक रक्षाबंधन समारोह का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। समारोह में रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों को आत्मिक शुद्धता, सकारात्मकता और परमात्मा से जुड़कर जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संदेश दिया गया।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था की संचालिका ब्रह्माकुमारी रानी दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है, यह हम सभी जानते हैं। लेकिन इसका आध्यात्मिक अर्थ इससे कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने कहा कि वास्तविक राखी वह है, जो मनुष्य के जीवन में परमात्मा के रक्षा कवच का कार्य करे। यह ऐसा पवित्र बंधन है, जो व्यक्ति को बुराइयों, कमजोरियों और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि परमपिता परमात्मा की पवित्र राखी किसी जाति, धर्म या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए सुरक्षा और आत्मिक शक्ति का संदेश देती है। रक्षाबंधन के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पवित्रता, संयम, सद्भाव और भाईचारे को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।

 

कमजोरियों को परमात्मा को उपहार स्वरूप अर्पित करने का संदेश

समारोह के दौरान ब्रह्माकुमारी रानी दीदी ने उपस्थित लोगों को रक्षाबंधन के उपहार के रूप में अपनी कमियों और कमजोरियों को परमात्मा को समर्पित करने का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपनी बुराइयों और कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प ले, तो यही रक्षाबंधन का वास्तविक आध्यात्मिक उपहार होगा। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक विचारों को स्थान दें और क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, नफरत जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर प्रेम, शांति और सद्भाव का मार्ग अपनाएं।

विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में दादी प्रकाशमणि की पुण्य स्मृति मनाई गई

समारोह के दौरान संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका एवं आदरणीय राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 19वीं पुण्य स्मृति दिवस भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। उन्हें स्मरण करते हुए विश्व बंधुत्व, प्रेम, शांति और मानव कल्याण के उनके संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में रक्षाबंधन के पर्व को केवल एक पारिवारिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि विश्व बंधुत्व, आत्मिक सुरक्षा और मानवता के प्रति प्रेम का पर्व बनाने का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, शांति और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया। समारोह का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और आत्मीयता से परिपूर्ण रहा। रक्षाबंधन के अवसर पर दिए गए संदेश ने उपस्थित लोगों को पर्व के आध्यात्मिक एवं मानवीय महत्व से परिचित कराया।

 

 

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