RELIGION

जितिया व्रत की तिथि पर असमंजस खत्म! प्रेमाचार्य पीताम्बर ने बताया—3 अक्टूबर को ही रखा जाएगा व्रत

शास्त्र, पंचांग और धर्मसिंधु के प्रमाणों का हवाला देते हुए कहा—4 अक्टूबर नहीं, 3 अक्टूबर है जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि; अपुष्ट सूचनाओं से बचने की अपील

न्यूज विज़न। बक्सर
जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत की तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच चल रहे असमंजस के बीच श्री प्रेमाचार्य पीताम्बर ने इस वर्ष व्रत की तिथि को लेकर अपना निर्णय स्पष्ट किया है। उन्होंने शास्त्र, पंचांग और धर्मसिंधु में दिए गए प्रमाणों का हवाला देते हुए कहा कि इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर को ही किया जाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्रत की तिथि 4 अक्टूबर बताए जाने से माताओं और बहनों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

 

प्रेमाचार्य पीताम्बर के अनुसार, जितिया व्रत की तिथि का निर्धारण केवल सामान्य कैलेंडर या सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए शास्त्रीय प्रमाण, पंचांग और धर्मग्रंथों में वर्णित तिथि-विधान को आधार बनाया जाना आवश्यक है। इन्हीं प्रमाणों के आधार पर उन्होंने 3 अक्टूबर को जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए उचित तिथि बताया है।

 

संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है व्रत

जीवित्पुत्रिका व्रत हिंदू धर्म की प्रमुख व्रत परंपराओं में शामिल है। माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना को लेकर यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत की तिथि के साथ-साथ व्रत के नियम और पारण के समय का भी विशेष महत्व माना गया है।

ऐसे में तिथि को लेकर किसी प्रकार की चूक न हो, इसे लेकर प्रेमाचार्य पीताम्बर ने श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग माध्यमों और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए व्रत करने वाली माताएं-बहनें किसी भी जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय प्रमाणित पंचांग और मान्य आचार्य के निर्णय को प्राथमिकता दें।

सोशल मीडिया की अपुष्ट जानकारी से बचने की अपील

प्रेमाचार्य ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि जितिया व्रत जैसे धार्मिक अनुष्ठान की तिथि को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तिथि निर्धारण में शास्त्रीय प्रमाणों को आधार बनाना जरूरी है।

उन्होंने माताओं और बहनों से विशेष रूप से अपील की कि 3 अक्टूबर को जितिया व्रत किए जाने की जानकारी अपने परिचितों, परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं तक भी पहुंचाएं, ताकि तिथि को लेकर बना भ्रम दूर किया जा सके और श्रद्धालु निर्धारित तिथि के अनुसार विधि-विधान से व्रत कर सकें।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण व्रत में तिथि की स्पष्टता आवश्यक है। श्रद्धालुओं को प्रमाणित पंचांग और मान्य धार्मिक विद्वानों के मार्गदर्शन के अनुसार ही व्रत एवं पारण से संबंधित निर्णय लेना चाहिए।

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