मजदूर दिवस पर गूंजा हक की आवाज़: लेबर कोड के खिलाफ भाकपा-माले का जोरदार प्रदर्शन
ज्योति चौक से निकला जुलूस, मजदूरों के अधिकारों में कटौती और कॉरपोरेट नीति के खिलाफ उठी आवाज़


न्यूज़ विज़न। बक्सर
विश्वव्यापी और देशव्यापी स्तर पर मनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर बिहार के बक्सर में भी मजदूर संगठनों ने अपनी ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन किया। इसी क्रम में भाकपा-माले और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के संयुक्त तत्वावधान में शहर के ज्योति चौक से एक विशाल जुलूस निकाला गया।
इस जुलूस का नेतृत्व खेग्रामस के जिला अध्यक्ष कन्हैया पासवान, उपाध्यक्ष ललन राम, भाकपा-माले के इटाढ़ी सचिव जगनारायण शर्मा, बक्सर टाउन सचिव ओम प्रकाश, ब्रह्मपुर सचिव बीर बहादुर पासवान, आइसा नेता अखिलेश और भगवान दास ने किया। जुलूस में बड़ी संख्या में मजदूर, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने मजदूर एकता और अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए। जुलूस के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नई श्रम नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का मजदूर दिवस ऐसे समय में मनाया जा रहा है, जब 1 अप्रैल से लागू नए लेबर कोड ने मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर दिया है। वक्ताओं का आरोप था कि ये कानून मजदूरों के हितों की रक्षा करने के बजाय कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आठ घंटे के कार्यदिवस जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि अब खतरे में है। ठेका प्रथा और गिग इकॉनमी के बढ़ते प्रभाव के चलते मजदूरों के काम के घंटे बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें ओवरटाइम का उचित भुगतान नहीं मिल रहा। इसके साथ ही ट्रेड यूनियन बनाने की प्रक्रिया को भी जटिल बना दिया गया है, जिससे मजदूरों की सामूहिक आवाज कमजोर पड़ रही है। वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट गहराया है, जिसका असर भारत के उद्योगों पर भी पड़ा है। कई फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं और प्रवासी मजदूरों को फिर से अपने घर लौटना पड़ रहा है।
सभा में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार मजदूर आंदोलनों को दबाने के लिए दमनकारी नीतियों का सहारा ले रही है। मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं को झूठे आरोपों में फंसाया जा रहा है और आंदोलनों को देश-विरोधी करार दिया जा रहा है। वक्ताओं ने इसे लोकतंत्र और मजदूर अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उन्होंने मजदूरों, किसानों और छात्रों के बीच मजबूत एकजुटता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आज की लड़ाई सिर्फ मजदूरी या रोजगार की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की भी है। वक्ताओं ने आह्वान किया कि सभी वर्गों को एकजुट होकर इन नीतियों का विरोध करना होगा।
इस जुलूस और सभा में युवा नेता सर्वेश पाण्डेय, सफाईकर्मी संघ के सचिव शंकर तिवारी, संध्या पाल, आइसा नेता अजीत, माले नेता कुश भगवान, संजय कुमार सिंह, प्रमोद कुमार, अजित कुमार और तारा देवी समेत कई अन्य लोग भी शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में मजदूर एकता और अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ सभा का समापन किया गया।





