मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरक का करें प्रयोग
उर्वरक का संतुलित प्रयोग को लेकर आत्मा और केविके की ओर से चलाया जा रहा है जागरूकता अभियान


न्यूज विजन। बक्सर
खेतों में अत्यधिक रासायनिक खाद का उपयोग मिट्टी की सेहत को प्रभावित करती है, वहीं किसानों का लागत खर्च भी बढ़ जाता है। इसको लेकर किसानों के बीच उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को बढ़ावा देकर अधिकतम व गुणवत्तायुक्त उत्पादन के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्र स्तरीय अभियान के तहत बक्सर जिले के दलसागर पंचायत के परसिया गांव में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना संस्थान द्वारा जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र एवं आत्मा के संयुक्त तत्वाधान मे उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ हरिगोबिन्द ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित मात्रा मे प्रयोग करने तथा उचित फसल चक्र अपनाने के साथ ही दलहनी फसलों के प्रयोग पर बल दिया।
उन्होने बताया कि इससे मिट्टी की संरचना अच्छी रहती है, जिससे गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त होता है। साथ ही अगली फसल में उर्वरकों के कम प्रयोग होने से किसान लागत खर्च को कम कर अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। संस्तुति अनुरूप संतुलित उर्वरकों के प्रयोग से पर्यावरण की रक्षा होती है। उन्होंने जानकारी दी कि ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग, उड़द आदि फसलों को फूल आने से पहले खेत मे जुताई करने से मिट्टी के पोषक तत्वों में वृद्धि होती है तथा कार्बनिक पदार्थो की मात्रा बढ़ने से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता एवं लागत को कम किया जा सकता है। आत्मा के उप परियोजना निदेशक रणधीर ने फसल विविधीकरण पर किसानों को तकनीकी जानकारी दी।
जागरूकता अभियान कार्यक्रम में कृष्णा गोंड, ददन राजभर, रामाश्रय यादव, धनवन्तरी उपाध्याय, राजीव रंजन तिवारी सहित 25 से अधिक किसानों ने भाग लिया। मौके पर कृषि विज्ञान केन्द्र के सरफराज अहमद खान तथा कृषि समन्वयक अमरेश राय, किसान सलाहकार ओमप्रकाश मौजूद थे।





