स्वायल हेल्थ कार्ड में अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही उर्वरक का करें प्रयोग: डीएम
नगर भवन में आत्मा की ओर से जिला स्तरीय शारदीय खरीफ महाभियान का हुआ शुभारंभ


न्यूज विजन। बक्सर
कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा) बक्सर की ओर से नगर भवन बक्सर में एक दिवसीय जिला स्तरीय शारदीय खरीफ महाभियान का शुभारंभ किया गया। महाभियान का उद्घाटन डीएम साहिला एवं उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। डीएम साहिला ने कहा कि महाभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि बढ़ते तापमान, हीट वेव और प्राकृतिक आपदाओं का फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की आवश्यकता है।
डीएम ने कृषि विभाग के प्रसार कर्मियों को निर्देश दिया कि ग्राम स्तर पर नियमित रूप से संध्या किसान चौपाल आयोजित कर कृषि एवं कृषि से संबंधित विभागों की योजनाओं की जानकारी जनप्रतिनिधियों और किसानों तक पहुंचाएं। साथ ही किसानों की समस्याओं को संकलित कर संबंधित विभागों के समन्वय से उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए। डीएम ने स्वायल हेल्थ कार्ड के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड में अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इससे न केवल भूमि की उर्वरता सुरक्षित रहेगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
डीडीसी निहारिका छवि ने कहा कि उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की सेहत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो रही है। उन्होंने किसानों से स्वायल हेल्थ कार्ड की अनुशंसाओं के अनुरूप उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील की, जिससे उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के साथ-साथ भूमि संरक्षण भी संभव हो सके।
जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार ने खरीफ मौसम में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कृषि मैप, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा फार्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जिले के सभी प्रखंड मुख्यालयों में 10 से 22 जून 2026 तक प्रखंड स्तरीय शारदीय (खरीफ) महाभियान आयोजित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 11 से 30 जून 2026 तक कृषि जनकल्याण चौपाल-सह-खेत बचाओ अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे तकनीक आधारित खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।





