मानव जीवन के लिए वरदान स्वरूप है श्रीमद्भागवत कथा: पौराणिक जी
श्री रामेश्वर नाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा सह लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का हुआ शुभारंभ


न्यूज विजन। बक्सर
पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम की ओर से सोमवार को 18 में धर्म आयोजन श्रीमद्भागवत कथा सह लक्ष्मी नारायण महायज्ञ शुभारंभ शोभा यात्रा के साथ हुआ। वेद आदि धर्म शास्त्रों के अनुसार निर्धारित शोभा यात्रा जल भरी की पूजा श्री रामेश्वर नाथ मंदिर के कैलाश यज्ञ मंडपम में की गई।
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पीतल एवं तांबे का कलश लेकर गाजे बाजे के साथ हरि नाम संकीर्तन करते हुए पीपी रोड, पुराना सदर अस्पताल रोड, मेन रोड, बड़ी देवी, यमुना चौक, सत्यदेवगंज, मॉडल थाना होते हुए श्री रामरेखा घाट पर गंगा जी की पूजा किए । इसके बाद कलश में गंगाजल भरकर श्री रामेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में बने यज्ञ मंडप की परिक्रमा करके कलश यज्ञ मंडप में स्थापित किया गया।वैदिक विधि के अनुसार कलश यात्रा प्रातः काल श्रेष्ठ माना गया है। सायं काल संत विद्वानों की पूजा एवं आशीर्वचन के उपरांत व्यास पीठ की पूजा की गई।
व्यास पीठ पर विद्यमान आचार्य श्री पौराणिक जी ने बताया कि वर्तमान समय में साधुओं संतो एवं कथा व्यासों ने कथा को व्यावसायिक दृष्टि से परिवर्तित करके कथा को ही व्यथा बना दिया है, जो अत्यंत ही पीड़ा का विषय है। कथा व्यास का लक्षण बताते हुए पौराणिक जी ने कहा कि कथा प्रारंभ की एक दिन पूर्व वक्ता को संपूर्ण दाढ़ी, मूछ, बाल, नाक, नाखून आदि का एक साथ सफाई करना चाहिए। जो लोग केवल दाढ़ी-मूछ कटवाते हैं, बाल बड़े-बड़े रखकर हिजाब लगाते हैं, प्रतिदिन दाढ़ी बनाते हैं और अन्य बहुत से कार्य जेंस पार्लर में जाकर अपना श्रृंगार कर रंग-बिरंगे वस्त्र आदि धारण करते हैं तथा गैर ब्राह्मण एवं स्त्री का कथा प्रवचन आदि आदि यह सभी कार्य घोर अधर्म है। सर्वजन कल्याण सेवा समिति द्वारा आयोजित इस धर्म आयोजन में वक्ता एवं यजमान दोनों ही शास्त्रीय विधि का पालन करते हैं।
आचार्य श्री ने कहा कि भागवत कथा भगवान का वांग्मय विग्रह है इसे एक पोथी समझना मानव के जीवन की सबसे बड़ी भूल है। पद्म पुराण एवं स्कंद पुराण में भागवत महात्म का विशेष वर्णन है। भागवत का पूजन पुस्तक जानकर नहीं अपितु साक्षात भगवान श्री कृष्ण का अक्षर आत्मक विग्रह समझकर पूजन एवं श्रवण करना चाहिए। इसके प्रमाण महाराज परीक्षित, धुंधकारी एवं ज्ञान वैराग्य आदि आदि प्रत्यक्ष रूप से है, जिनका उद्धार कथा श्रवण करते ही सातवें दिन हो गया। यह कथा समस्त पाप, ताप, संताप को नष्ट करने वाली, मानवता का निर्माण करने वाली, संसार में सुख शांति की स्थापना करने वाली कथा है। यह भागवत कथा हम सभी के लिए इस संसार में वरदान स्वरुप है।





