RELIGION

जीवित्पुत्रिका व्रत पर गंगा घाटों पर उमड़ी आस्था, माताओं ने रखा 24 घंटे का निर्जला व्रत

रामरेखा घाट समेत विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़, प्रशासन ने संभाली सुरक्षा और यातायात व्यवस्था; रविवार सुबह होगा व्रत का पारण

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने शनिवार को 24 घंटे का कठिन निर्जला जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत रखा। तीन दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ हुई। शनिवार तड़के से ही बक्सर के ऐतिहासिक रामरेखा घाट सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। व्रती महिलाओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

 

पूजन के दौरान भगवान जीमूतवाहन की कुशा से निर्मित प्रतिमा को धूप, दीप, अक्षत और पुष्प अर्पित किए गए। इसके साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से चील एवं सियारिन की प्रतिमाएं बनाई गईं और उनके माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाया गया। पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने समूह में बैठकर चील-सियारिन और जीवित्पुत्रिका व्रत से जुड़ी पौराणिक कथाएं सुनीं। इस दौरान आचार्यों को दान-दक्षिणा भी दी गई। पंडित सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि निष्ठापूर्वक व्रत, कथा श्रवण और दान करने से संतान को दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

गंगा घाटों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

गंगा नदी में जलस्तर को देखते हुए प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। व्रती महिलाओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती गई। रामरेखा घाट, नाथाबाबा घाट, सती घाट, गोला घाट और सिद्धनाथ घाट समेत अन्य गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

ट्रैफिक व्यवस्था भी रही दुरुस्त

जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर शहर में बढ़ी भीड़ के मद्देनजर यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए ज्योति प्रकाश चौक, अंबेडकर चौक, सिंडिकेट नहर पुल, गोलंबर, नया बाजार और मठिया मोड़ समेत प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की गई थी। बड़े वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक लगाई गई, जबकि गंगा घाटों के पहुंच पथों पर भी वाहनों के परिचालन को प्रतिबंधित रखा गया।

सड़कों और घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद प्रशासन की तत्परता के कारण शहर में जाम की गंभीर समस्या उत्पन्न नहीं हुई। पंडित सुरेंद्र तिवारी के अनुसार, रविवार सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद व्रती महिलाएं पारण करेंगी और इसके साथ ही 24 घंटे के निर्जला व्रत का समापन होगा।

 

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