बिलौटी कांड डीएसपी जगदीशपुर, तत्कालीन थानाध्यक्ष शहापुर समेत सभी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज
भरत तिवारी की मां के आवेदन पर शाहपुर थाना में दर्ज हुई एफआईआर, जांच में हत्या साबित होने पर उम्रकैद तक की हो सकती है सजा


न्यूज़ विज़न। बक्सर
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बिलौटी गांव में 18 जून को हुई भरत तिवारी की कथित फर्जी एनकाउंटर के मामले में बड़ा कानूनी और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। मृतक की मां आशा देवी द्वारा भोजपुर पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन के आधार पर शाहपुर थाना में हत्या का मुकदमा 178/26 दर्ज कर लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भोजपुर एसपी श्री राज के निर्देश पर दर्ज एफआईआर में जगदीशपुर डीएसपी राजेश कुमार, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित कथित एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को नामजद अथवा आरोपित बनाया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 के तहत दर्ज किया गया है, जो पूर्व की भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 अर्थात हत्या के अपराध के समकक्ष माना जाता है। मृतक की मां आशा देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके पुत्र भरत तिवारी की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई और इसे पुलिस मुठभेड़ का रूप देने का प्रयास किया गया। आवेदन में संबंधित पुलिस अधिकारियों और जवानों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच के दौरान यह साबित हो जाता है कि भरत तिवारी की मौत वैध पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि हत्या थी, तो आरोपित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को धारा 103 के तहत कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है। इस धारा में दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद अथवा अन्य गंभीर सजा का प्रावधान है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह चुनौती होगी कि घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई, उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सच्चाई सामने लाई जाए।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में आगे की जांच के दौरान अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, साक्ष्य छिपाने या गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। उल्लेखनीय है कि बिलौटी गांव में हुई इस घटना को लेकर लगातार राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहस जारी है। विभिन्न संगठनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। वहीं मृतक के परिजन न्यायिक जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। अब सभी की निगाहें जांच की आगामी प्रक्रिया और प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं। यह मामला न केवल भोजपुर बल्कि पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





