बक्सर में बिहार बंद का व्यापक असर: NEET पेपर लीक और छात्र दमन के विरोध में सड़क पर उतरे सैकड़ों छात्र-युवा
आइसा-आरवाईए के संयुक्त आह्वान पर निकला विशाल जुलूस, ज्योति चौक पर सड़क जाम कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी; गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग


न्यूज़ विज़न। बक्सर
आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) के संयुक्त आह्वान पर शनिवार को आयोजित बिहार बंद का बक्सर में व्यापक असर देखने को मिला। सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं और युवा शहर के किला मैदान में जुटने लगे। इसके बाद किला मैदान से विशाल जुलूस निकाला गया, जो शहर की प्रमुख सड़कों से होते हुए ज्योति चौक पहुंचा। यहां प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और छात्रों के आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध किया गया।
जुलूस का नेतृत्व कर रहे इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि NEET पेपर लीक के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, फायरिंग, गिरफ्तारी और दमनात्मक कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के 18 जिलों में शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों पर पुलिसिया कार्रवाई की गई है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए दमन का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि पटना में आइसा के राज्य सचिव दीपंकर मिश्रा और राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, लेकिन अब तक उनके ठिकाने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने इसे कानून के शासन और नागरिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए दोनों नेताओं समेत सभी गिरफ्तार छात्र-छात्राओं को बिना शर्त तत्काल रिहा करने की मांग की।
डॉ. अजीत कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि भाकपा-माले की विधान परिषद सदस्य शशि यादव, विधायक संदीप सौरभ और आइसा के कई अन्य नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक आंदोलनों को अपराध की तरह पेश करने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने मांग की कि सभी फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं और आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराई जाए। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों मेहनतकश और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। वर्षों की मेहनत और आर्थिक कठिनाइयों के बाद परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ यह गंभीर अन्याय है। ऐसे में छात्रों का अपने भविष्य की सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना पूरी तरह लोकतांत्रिक अधिकार है, जिसे बल प्रयोग से दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं क्यों हो रही हैं, इनके पीछे कौन लोग हैं और अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार, लापरवाही और पेपर माफिया के गठजोड़ पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। सभा के अंत में सरकार से मांग की गई कि वह दमन का रास्ता छोड़कर छात्रों की बात सुने, सभी गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा करे, फर्जी मुकदमे वापस ले, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराए तथा पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाने की भी मांग की गई।
कार्यक्रम में आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, अनूप शर्मा, आरवाईए जिला संयोजक राजदेव सिंह, बाबूलाल राम, शैलेन्द्र पासवान, शिवजी राम, सुरेन्द्र प्रसाद, विवेक कुमार, लक्ष्मण भारती, कृष्णा यादव, रविशंकर कुमार, बिरन यादव, अभिषेक पासवान, रिंकू कुरैशी, प्रभात कुमार, रवि मौर्या, अनाम कुमार, दीपू कुमार, गुड्डू, बलीराम, संतोष यादव, राजकुमार, राजेश कुशवाहा, देवेन्द्र प्रियदर्शी, कुंदन कुमार, हरेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, जनसंगठनों के प्रतिनिधि, महिलाएं और छात्राएं मौजूद रहीं।





