सिविल कोर्ट बक्सर में न्यायिक प्रक्रिया होगी और डिजिटल, नवनियुक्त यूडीसी को CIS 4.0 पर मिला विशेष प्रशिक्षण
ई-समन जारी करने की प्रक्रिया, सावधानियों और तकनीकी पहलुओं से कराया गया अवगत, न्यायिक कार्यों को अधिक पारदर्शी व समयबद्ध बनाने पर जोर


न्यूज़ विज़न। बक्सर
सिविल कोर्ट, बक्सर में न्यायिक कार्यों के डिजिटलीकरण को और अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने की दिशा में शनिवार को नवनियुक्त अपर डिवीजन क्लर्क (यूडीसी) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में सीआईएस (Case Information System) 4.0 के माध्यम से गवाहों को क्रमिक तिथियों पर ई-समन जारी करने की प्रक्रिया की जानकारी देना तथा न्यायालयीय कार्यों में डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करना था।
यह प्रशिक्षण न्यायालय परिसर स्थित 16 कोर्ट बिल्डिंग के कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान सिस्टम ऑफिसर विजय कुमार सिंह ने नवनियुक्त लिपिकों को सीआईएस 4.0 में ई-समन जारी करने की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि न्यायालयीय कार्यों में ई-समन प्रणाली की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में लिपिकों को इसकी तकनीकी बारीकियों, आवश्यक सावधानियों तथा प्रक्रिया संबंधी महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि भविष्य में न्यायिक कार्यों के निष्पादन में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। कार्यक्रम के दौरान प्रभारी प्रशासन न्यायालय राजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य न्यायालयों में सीआईएस 4.0 प्रणाली के माध्यम से ई-समन जारी करने की प्रक्रिया को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाना है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में डिजिटल तकनीक का बढ़ता उपयोग न्यायिक प्रक्रिया को सरल, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और न्यायालयों की कार्यप्रणाली भी अधिक व्यवस्थित होगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधान लिपिक संजय कुमार सहित अविनाश कुमार, अभिषेक, सोनम, कहकशां परवीन, राहुल, दीक्षित, सोनिका, चंदन, राजेश, प्रिया, रचिता, साक्षी, ऋचा, आशुतोष, गुड्डू, मणिराज, गौरव, आरती समेत सभी नवनियुक्त अपर डिवीजन क्लर्क उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान ई-समन प्रणाली से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त की और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। न्यायालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से न्यायालयों में डिजिटल प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा, जिससे न्यायिक कार्यों की गति बढ़ेगी और आम लोगों को समयबद्ध एवं पारदर्शी न्यायिक सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।





