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बक्सर में आशा कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन, 26 हजार मानदेय समेत सात सूत्री मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

नगर भवन से निकला विशाल प्रदर्शन, गगनभेदी नारों के साथ डीएम कार्यालय पहुंचीं आशा एवं आशा फैसिलिटेटर; मांगें पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के राज्य सामान्य परिषद के निर्णय के आलोक में मंगलवार, 6 अक्टूबर को बक्सर जिले की तमाम आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। नगर भवन से शुरू हुआ यह प्रदर्शन गगनभेदी नारों के साथ जिला पदाधिकारी के समक्ष पहुंचा, जहां कार्यकर्ताओं ने सरकार के समक्ष अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा।

 

प्रदर्शन का नेतृत्व जिला संयोजक अरुण कुमार ओझा, महावीर पंडित, हरे राम सिंह, परमहंस सिंह, मीरा देवी, अभिराजू देवी, मंजू देवी, सरस्वती देवी, कंचन देवी और लीला देवी सहित अन्य नेताओं ने किया। प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार से समय पर प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने, राज्य मद की राशि का भुगतान सुनिश्चित करने तथा न्यूनतम मजदूरी 26 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई। सभा को संबोधित करते हुए आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें कई बार काम के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिल पाता है। प्रखंड स्तर पर राशि उपलब्ध रहने के बावजूद भुगतान में देरी की जाती है। भुगतान के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है और कई बार उन्हें कथित रूप से प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ता है।

 

आशा कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी कर्मियों की तर्ज पर सेवानिवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने की भी मांग की। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी से संबंधित निर्णय के आधार पर बिहार सरकार द्वारा भी आवश्यक प्रस्ताव केंद्र को भेजने की मांग उठाई गई। प्रदर्शन के दौरान आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों की ओर से सात सूत्री मांगों का ज्ञापन जिला पदाधिकारी को सौंपा गया। ज्ञापन कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति के नाम संबोधित था।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं आशा कार्यकर्ता : अरुण ओझा

जिला संयोजक अरुण कुमार ओझा ने कहा कि बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर रीढ़ की तरह काम करती हैं। उनके कार्यों की सराहना विश्व स्वास्थ्य संगठन, भारत सरकार और राज्य सरकार की ओर से लगातार की जाती रही है। कोरोना काल के दौरान भी आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उनके कार्यों की सराहना देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर हुई थी। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के बावजूद आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को मिलने वाली अल्प राशि का भुगतान कई-कई महीनों से लंबित है। इससे कार्यकर्ताओं के सामने आर्थिक परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं।

अरुण कुमार ओझा ने सरकार से मांगों पर तत्काल सकारात्मक पहल करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आशा कार्यकर्ता एवं आशा फैसिलिटेटर आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर हड़ताल जैसी कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने और लंबित प्रोत्साहन राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

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