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दो मासूमों की मौत पर फूटा गुस्सा, थर्मल पावर प्लांट कोल डिपो में काम ठप

25-25 लाख मुआवजे और परिजनों को नौकरी की मांग पर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कोयला परिवहन मार्ग जाम

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जिले के थर्मल पावर प्लांट स्थित कोल डिपो के पास दो किशोरों की दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को महादलित बस्ती के लोगों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं बक्सर वारियर के रंजन राय के नेतृत्व में कोयला लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य बंद करा दिया तथा प्लांट में कोयला ले जाने वाले मार्ग को जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

 

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सीआईएसएफ के जवानों के साथ प्लांट प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। हालांकि ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग करते रहे। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को महादलित बस्ती के दो बच्चे कोल डिपो के समीप खेलते-खेलते पहुंच गए थे। बताया जा रहा है कि किसी के डांटने के बाद दोनों बच्चे पास की एक पुलिया में छिपने चले गए। इसी दौरान वहां पानी में पड़े कटे हुए बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगने से दोनों बच्चे पानी में गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने तत्काल उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान महादलित बस्ती निवासी ढोंढा मुसहर के 10 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार तथा दिमागी मुसहर के 12 वर्षीय पुत्र सुभाष कुमार के रूप में हुई है।

 

गरीब परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृत दोनों बच्चे बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे। उनके माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक साथ दो बच्चों की असामयिक मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि गांव के लोग भी इस घटना से आहत हैं।

10-10 हजार देकर मामला दबाने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के बाद संबंधित ठेकेदार द्वारा दोनों मृतक परिवारों को 10-10 हजार रुपये देकर मामले को शांत कराने की कोशिश की गई। उस समय परिजन गहरे सदमे में होने के कारण कुछ नहीं बोल सके, लेकिन जैसे-जैसे घटना की जानकारी लोगों तक पहुंची, गांव में नाराजगी बढ़ती गई। इसी आक्रोश के चलते गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कोल डिपो पहुंच गए और वहां चल रहे कार्यों को बंद करा दिया। प्रदर्शनकारियों ने कोयला परिवहन मार्ग जाम कर प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।

“दो मासूमों की जिंदगी की कीमत 10 हजार नहीं” : रंजन राय
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बक्सर वारियर के रंजन राय ने कहा कि दो मासूम बच्चों की मौत बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दो मासूमों की जिंदगी की कीमत 10-10 हजार रुपये नहीं हो सकती। गरीब परिवारों के बच्चों की जान भी उतनी ही मूल्यवान है जितनी किसी बड़े परिवार की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लांट और उससे जुड़े कार्यों से कई प्रभावशाली लोग लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन जब गरीब परिवारों पर संकट आता है तो उनकी पीड़ा को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और प्लांट प्रबंधन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं—
मृतक दोनों बच्चों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाए।
घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
प्लांट परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

बातचीत जारी, कामकाज प्रभावित
समाचार लिखे जाने तक कोल डिपो में लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य प्रभावित रहा। प्रशासनिक अधिकारी, प्लांट प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच वार्ता का दौर जारी था। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग नजर आए। पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों और गरीब परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन और प्लांट प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

 

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