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देव-सम्पत्ति पर कथित कब्जे का आरोप, न्यासधारी ने प्रशासन से लगाई गुहार

रामरेखा घाट स्थित श्री शिव पार्वती सह भैरो मंदिर सह धर्मशाला की धार्मिक गरिमा बहाल करने की मांग, राजस्व निरीक्षण कराकर जांच एवं कार्रवाई का आग्रह

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
रामरेखा घाट स्थित अति प्राचीन एवं पवित्र सार्वजनिक धार्मिक स्थल श्री शिव पार्वती सह भैरो मंदिर सह धर्मशाला, निबंधित न्यास संख्या 4940/26, की देव-सम्पत्ति को कथित अनधिकृत कब्जे से मुक्त कराने तथा मंदिर की धार्मिक गरिमा एवं मर्यादा की पुनर्स्थापना को लेकर न्यासधारी संजय कुमार सिन्हा ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद एवं जिला प्रशासन से विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में दिए गए आवेदन में देव-सम्पत्ति की सुरक्षा एवं धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

 

न्यासधारी के अनुसार, उक्त मंदिर एवं धर्मशाला की स्थापना धर्म-सेवा, देव-पूजन और लोककल्याण की पवित्र भावना से की गई थी। यह स्थल लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि श्यामा दास उर्फ सच्चिदानंद पाठक एवं केदार नाथ सिंह द्वारा बिना न्यास की अनुमति देव-सम्पत्ति पर कथित रूप से अनधिकृत दखल-कब्जा किया गया है। न्यासधारी ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि देव-सम्पत्ति किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सार्वजनिक धरोहर से जुड़ी संपत्ति है। इसलिए इसकी पवित्रता, पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं एवं श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है। न्यासधारी ने कहा कि मंदिर एवं धर्मशाला की मूल भावना और धार्मिक उपयोग को बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।

 

न्यासधारी ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित स्थल का राजस्व निरीक्षण कराया जाए तथा अभिलेखों एवं वास्तविक स्थिति की जांच कर कथित अनधिकृत कब्जे की स्थिति स्पष्ट की जाए। जांच में यदि किसी व्यक्ति द्वारा अवैध दखल या कब्जे की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही देव-सम्पत्ति को कथित अवैध कब्जे से मुक्त कराकर न्यास व्यवस्था के तहत विधिवत सौंपने की भी मांग की गई है। संजय कुमार सिन्हा ने शासन-प्रशासन से करबद्ध प्रार्थना करते हुए कहा कि मंदिर की पवित्रता, देव-सेवा की परंपरा एवं श्रद्धालुओं के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए मामले में शीघ्र न्यायोचित कदम उठाए जाएं। अब इस मामले में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद एवं जिला प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना शेष है।

 

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