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अनुमंडलीय पुस्तकालय के विकास को मिल रही नई गति, अधिकारियों और समाजसेवियों ने बढ़ाए सहयोग के हाथ

रामरेखा घाट स्थित पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा बेहतर शैक्षणिक माहौल, अपर्णा ने दीं महत्वपूर्ण पुस्तकें तो सोनू जायसवाल ने भेंट किए 10 मिनी प्लांट

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
मरेखा घाट स्थित अनुमंडलीय पुस्तकालय में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन और समाज के सहयोग से सकारात्मक पहल की जा रही है। अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के विशेष प्रयास एवं सहयोग से पुस्तकालय के विकास और सुविधाओं को बेहतर बनाने की मुहिम अब धीरे-धीरे गति पकड़ रही है। इस पहल को सामाजिक सहभागिता से और मजबूत बनाने के उद्देश्य से समाजसेवी रामजी सिंह ने भी सहयोग अभियान की शुरुआत की है।

 

इसी क्रम में बक्सर में रहकर शिक्षा प्राप्त करने के बाद वर्तमान में अंचलाधिकारी के पद पर कार्यरत अपर्णा सिंह ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए कई महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराई हैं। इन पुस्तकों में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उपयोगी अध्ययन सामग्री शामिल है। वहीं, बक्सर निवासी एवं वर्तमान में औरंगाबाद में नियोजन पदाधिकारी के पद पर कार्यरत सोनू जायसवाल ने पुस्तकालय को एक पॉकेट पेपरवेट तथा परिसर के सौंदर्यीकरण और सकारात्मक वातावरण के लिए गमलों सहित 10 मिनी प्लांट भेंट किए हैं।

 

समाजसेवी रामजी सिंह ने कहा कि यह पुस्तकालय विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगा, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण महंगे कोचिंग संस्थानों और निजी अध्ययन केंद्रों का खर्च वहन नहीं कर पाते हैं। किराए के छोटे-छोटे कमरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों को यहां निःशुल्क और बेहतर अध्ययन का माहौल उपलब्ध होना अपने आप में सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े आर्थिक सहयोग की जरूरत नहीं होती। एक पुस्तक, एक पौधा या विद्यार्थियों की जरूरत की कोई छोटी सामग्री भी उनके भविष्य को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

रामजी सिंह ने अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए अपर्णा सिंह एवं सोनू जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही बक्सर के अधिकारियों, व्यवसायियों, शिक्षित युवाओं और समाजसेवियों से अपील की कि वे इस पुस्तकालय को अपना समझकर इसके विकास में यथासंभव योगदान दें। कोई पुस्तकें उपलब्ध कराए तो कोई फर्नीचर, पंखा, पौधे अथवा विद्यार्थियों की जरूरत की अन्य सामग्री देकर इस अभियान से जुड़ सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य पुस्तकालय को केवल किताबें पढ़ने का स्थान बनाना नहीं, बल्कि इसे बक्सर के युवाओं के सपनों, संघर्ष और सुनहरे भविष्य का मजबूत केंद्र बनाना है। जब समाज अपने विद्यार्थियों के साथ खड़ा होता है, तभी शिक्षित और सशक्त समाज की मजबूत नींव तैयार होती है।

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