षोडशी संस्कार को लेकर हुए धार्मिक अनुष्ठान, ब्रह्मलीन दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती की स्मृति में भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
स्वामी साहजानंद सरस्वती आश्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने दी श्रद्धांजलि, 16 दंडी संन्यासियों की उपस्थिति को लेकर उठे सवाल के बाद राजगुरु मठ में अलग से संपन्न हुआ षोडशी संस्कार


न्यूज़ विज़न। बक्सर
स्वामी साहजानंद सरस्वती आश्रम प्रांगण में ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 दंडी स्वामी देवानंद सरस्वती की षोडशी सह भंडारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और गणमान्य लोगों ने भाग लेकर ब्रह्मलीन स्वामी देवानंद सरस्वती को श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक आदर्शों को स्मरण किया। आयोजन दंडी स्वामी परमात्मानंद सरस्वती के नेतृत्व में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान संतों ने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी देवानंद सरस्वती का संपूर्ण जीवन धर्म, सेवा, वैराग्य और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज आध्यात्मिक उन्नति और नैतिक मूल्यों को मजबूत कर सकता है। इसके बाद आयोजित विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान उस समय स्थिति चर्चा का विषय बन गई जब ब्रह्मलीन स्वामी देवानंद सरस्वती के शिष्य एवं वर्तमान में राजगुरु मठ, शिवाला घाट के संरक्षक जगद्गुरु शंकराचार्य अनंतानंत सरस्वती कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए।
जगद्गुरु शंकराचार्य अनंतानंत सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार षोडशी संस्कार में 16 दंडी संन्यासियों की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनका कहना था कि यदि यह धार्मिक परंपरा पूर्ण रूप से नहीं निभाई जाती है तो यह सनातन मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने समाज से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की। कार्यक्रम से लौटने के बाद राजगुरु मठ, शिवाला घाट में अलग से षोडशी संस्कार का आयोजन किया गया। यहां 16 दंडी संन्यासियों की उपस्थिति में वैदिक विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। अनुष्ठान के उपरांत संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंतानंत सरस्वती ने कहा कि सनातन परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि संन्यासी समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं, इसलिए धार्मिक विधि-विधानों और परंपराओं का पूरी निष्ठा एवं शास्त्रीय नियमों के अनुसार पालन होना चाहिए। इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं के बीच जहां एक ओर ब्रह्मलीन स्वामी देवानंद सरस्वती के प्रति गहरी श्रद्धा दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर सनातन परंपराओं के पालन को लेकर भी व्यापक चर्चा होती रही।
कार्यक्रम में सदर विधायक आनंद मिश्रा, सदर के पूर्व विधायक मुना तिवारी, पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय, अमित ब्रह्मचारी, राकेश कुमार राय उर्फ़ कल्लू राय, उदय राय, कुंदन राय, प्रशांत कुमार राय, पीयूष राय, शाहिल राय, अंकित कुमार, नरेंद्र शर्मा, चौसा प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि गुड्डू राय, बिट्टू राय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





