आचार्य शिवपूजन सहाय की जयंती पर साहित्य और अगस्त क्रांति के शहीदों को किया नमन
डॉ. के.के. मंडल महिला महाविद्यालय में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि एवं स्मरण समारोह, वक्ताओं ने कहा—साहित्यकार समाज की अमूल्य धरोहर


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहर के नया बाजार स्थित डॉ. के.के. मंडल महिला महाविद्यालय, बक्सर के सभागार में हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार आचार्य शिवपूजन सहाय की जयंती एवं अगस्त क्रांति के अमर शहीद सपूतों की स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, समाज और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले महापुरुषों के विचारों एवं आदर्शों को याद करते हुए उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. अनिल कुमार ने की, जबकि मंच संचालन प्रो. रामाधार सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने आचार्य शिवपूजन सहाय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि आचार्य शिवपूजन सहाय हिंदी साहित्य के ऐसे महत्वपूर्ण साहित्यकार थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज और ग्रामीण जीवन की वास्तविक तस्वीर को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि साहित्यकार समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को दिशा देने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। आचार्य शिवपूजन सहाय की साहित्यिक रचनाएं आज भी पाठकों के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं।
इस दौरान उनकी चर्चित कृति ‘देहाती दुनिया’ तथा उनकी कहानियों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण समाज, उसकी समस्याओं, जीवन-शैली और मानवीय संवेदनाओं का जिस सहजता एवं प्रभावशाली ढंग से चित्रण आचार्य शिवपूजन सहाय ने किया, वह हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान रखता है। उनकी रचनाओं में तत्कालीन समाज की वास्तविकता के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। कार्यक्रम में अगस्त क्रांति के अमर शहीदों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों का त्याग और बलिदान सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और शहीदों के संघर्ष से परिचित कराना समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
समारोह के दौरान महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रो. परमहंस सिंह, प्रो. सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रो. सूर्य नारायण सिंह, इंद्रमणि लाल, सुरेंद्र सिंह यादव, रामवती, मनोरमा, धीरेंद्र, विनीता सिंह एवं सुमित सहित अन्य शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। वहीं कर्मचारियों में रामनाथ सिंह, प्रशांत कुमार, रामप्रवेश सिंह एवं रीना मिश्रा उपस्थित रहे। छात्र-छात्राओं में रोशनी, अंजलि, गोल्डी, रूबी, नंदिनी, दिव्या, पिंकी, सीता, सोनम, शिवांगी, प्रियंका, अंकित, आजाद सहित अन्य छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में आचार्य शिवपूजन सहाय के साहित्यिक योगदान तथा अगस्त क्रांति के शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।





