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वीर कुंवर सिंह सेतु बंद करने की तैयारी! बक्सर–भरौली में जाम का खतरा, तीसरे पुल का निर्माण तेज

तीन लेन के नए गंगा पुल के एलाइनमेंट में देरी से प्रभावित हो रहा निर्माण, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती—सेतु बंद हुआ तो बक्सर–भरौली मार्ग पर यातायात हो सकता है बेकाबू

न्यूज़ विज़न। बक्सर/बलिया 
बक्सर और उत्तर प्रदेश के भरौली के बीच गंगा नदी पर बन रहे तीन लेन के नए पुल का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 3.2 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी पुल का निर्माण 368 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। परियोजना के तहत कुल 40 विशाल पिलरों का निर्माण होना है, जिनमें से 17 पिलर गंगा की मुख्य धारा में और 23 पिलर दोनों किनारों पर बनाए जा रहे हैं।

 

हालांकि, इस नए पुल का एलाइनमेंट वर्तमान वीर कुंवर सिंह सेतु तक पहुंचने के कारण निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। ऐसे में कार्यदाई संस्था और एनएचएआई द्वारा बक्सर और बलिया के जिलाधिकारियों से इस सेतु को तत्काल बंद करने का आग्रह किया गया है। लेकिन यह निर्णय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। पहले से ही बक्सर गोलंबर और भरौली गोलंबर पर भीषण जाम की समस्या बनी रहती है। ऐसे में यदि वीर कुंवर सिंह सेतु को बंद कर दिया जाता है, तो यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

 

इस मुद्दे पर बलिया प्रशासन ने नरहीं थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार सिंह से सुझाव मांगा था। थाना प्रभारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भरौली गोलंबर से गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर तक बनने वाले ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेस-वे के चालू होने तक सेतु को बंद नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बिना वैकल्पिक मार्ग तैयार किए पुल को बंद करना जाम की स्थिति को बेकाबू कर सकता है। वहीं, प्रोजेक्ट हेड संजय कुमार ने बताया कि मौजूदा सेतु के कारण तीन लेन पुल का निर्माण प्रभावित हो रहा है और इसे जल्द बंद करना आवश्यक हो गया है।

बीते कुछ महीनों में बक्सर शहर में यातायात का दबाव तेजी से बढ़ा है। बाजार, मुख्य सड़कों और हाईवे जंक्शनों पर लंबा जाम आम बात हो चुकी है। स्थानीय लोग और व्यापारी लंबे समय से एक वैकल्पिक मजबूत मार्ग की मांग कर रहे थे। ऐसे में यह नया पुल क्षेत्र के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इसके चालू होते ही भारी वाहनों और लंबी दूरी की बसों का रूट डायवर्ट हो जाएगा, जिससे शहर के अंदरूनी मार्गों पर यातायात का दबाव कम होगा और जाम की समस्या में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

परियोजना के प्रमुख फायदे:
बिहार–दिल्ली रूट पर यात्रा समय में होगी बड़ी कमी
भारी वाहनों का रूट डायवर्जन, शहर में जाम से राहत
व्यापार, कृषि, उद्योग और ट्रांसपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा
रोजगार और स्थानीय व्यवसाय में वृद्धि की संभावनाएं

 

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