न्याय की पहली सीढ़ी हैं न्यायिक कर्मचारी : काजल झांब
व्यवहार न्यायालय बक्सर में नवनियुक्त लिपिकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में न्यायिक प्रक्रिया, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता पर दिया गया विशेष जोर


न्यूज़ विज़न। बक्सर
व्यवहार न्यायालय बक्सर में नवनियुक्त लिपिकों एवं न्यायिक कर्मचारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब ने कहा कि न्यायालयीय प्रक्रिया और कार्य संपादन की कला का कुशल प्रशिक्षण न्यायिक कर्मियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायालय केवल कानून का संस्थान नहीं, बल्कि आम लोगों की उम्मीदों और विश्वास का केंद्र होता है, जहां कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जिला विधिक सेवा सदन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय मनीष कुमार शुक्ला तथा न्यायिक दंडाधिकारी सह नोडल अधिकारी चंदन कुमार ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए काजल झांब ने कहा कि विश्वविद्यालय और न्यायालय के वातावरण में काफी अंतर होता है। न्यायालय में कार्य करने वाले कर्मियों को संवेदनशीलता, अनुशासन, धैर्य और व्यवहार कुशलता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोग न्याय की उम्मीद लेकर न्यायालय पहुंचते हैं और उनकी पहली मुलाकात न्यायालय कर्मियों से ही होती है। ऐसे में कर्मचारियों का व्यवहार ही न्यायालय की साख और गरिमा तय करता है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से कहा कि यह गर्व का विषय है कि वे न्याय व्यवस्था जैसी सम्मानजनक सेवा से जुड़े हैं और न्याय दिलाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है। न्यायाधीश भी प्रतिदिन नए अनुभवों से सीखते हैं और कई बार वरिष्ठ कर्मचारियों से भी व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूक, संवेदनशील और कार्यकुशल कर्मचारी न्याय प्रशासन की रीढ़ होते हैं। न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं को सरल बनाकर अभिलेखों के निष्पादन में उनकी भूमिका अत्यंत अहम होती है। न्यायिक दंडाधिकारी सह नोडल अधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि नवनियुक्त कर्मचारियों को वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे न्यायालयीय कार्यों की जटिलताओं और तकनीकी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को अलग-अलग विभागों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी शाखा में कार्य करने में उन्हें कठिनाई न हो। उन्होंने जानकारी दी कि प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले रविवार को भी आयोजित होगा, जिसमें न्यायालय की अन्य जटिल प्रक्रियाओं और कार्य कौशल से कर्मचारियों को अवगत कराया जाएगा।
प्रभारी प्रशासन राजीव कुमार श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि कैदियों को जेल भेजने से पूर्व माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अक्षरशः पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बंदियों के अधिकारों की रक्षा करना न्यायालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। पूर्व सिरेस्तदार अजय कुमार सिंह ने न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों और उनमें बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी। वहीं दीवानी मामलों के सिरेस्तदार रजनीकांत मिश्र ने स्वत्व वाद सहित अन्य दीवानी मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया और कुटुंब न्यायालय से जुड़े मामलों में न्यायिक कर्मचारियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में न्यायालयीय कार्य प्रणाली, पत्राचार प्रक्रिया, विभिन्न न्यायिक रजिस्टरों के संधारण तथा न्यायिक प्रक्रिया में कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर प्रभारी प्रशासन राजीव कुमार श्रीवास्तव, सुधीर कुमार, सुनील कुमार, नाजिर संतोष कुमार द्विवेदी, सिस्टम ऑफिसर विजय कुमार सिंह, नायब नाजिर दीपक गुप्ता सहित कई न्यायिक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अविनाश कुमार, दीक्षित कुमार, रविशंकर झा, राहुल कुमार, मंजुला कुमारी, कोमल सिंह, सोनम कुमारी, प्रिया कुमारी, कहकशां परवीन, सतीश कुमार, राजेश कुमार सहित अन्य नव नियुक्त कर्मचारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी चंदन कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नाजिर संतोष कुमार द्विवेदी ने किया।





