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एक माह भी नहीं टिक पाया बक्सर का नया इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज! निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

14 नंबर पिलर के पास पहुंच मार्ग ध्वस्त, लोगों में आक्रोश; प्रशासन, इंजीनियरों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जिले के बहुप्रतीक्षित इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को लेकर एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह ओवरब्रिज अभी एक माह भी पूरा नहीं कर पाया था कि शुक्रवार सुबह इसके पहुंच मार्ग (एप्रोच रोड) पर 14 नंबर पिलर के समीप सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और निर्माण कार्य में भारी अनियमितता तथा भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस परियोजना का शुभारंभ किया गया, वह इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त कैसे हो गई? लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ होता तो पुल के आरंभ होने के कुछ ही दिनों बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

 

श्रेय लेने वालों की चुप्पी पर भी उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिले में जब भी कोई बड़ी परियोजना पूरी होती है तो उसके उद्घाटन और श्रेय लेने के लिए नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच होड़ मच जाती है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उपलब्धियों का प्रचार किया जाता है। लेकिन जब उसी परियोजना में खामियां सामने आती हैं तो जिम्मेदारी लेने के बजाय सभी चुप्पी साध लेते हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर अब इस मामले पर जनप्रतिनिधि क्या कहेंगे? क्या वे निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग से जवाब मांगेंगे या फिर इस मामले को भी अन्य घटनाओं की तरह भुला दिया जाएगा?

जांच प्रक्रिया पर भी खड़े हुए प्रश्न
* किसी भी पुल या ओवरब्रिज को आम जनता के लिए खोलने से पहले तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज के मामले में सभी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन किया गया था?

* यदि जांच हुई थी तो फिर निर्माण के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने या क्षतिग्रस्त होने की नौबत क्यों आई? और यदि गुणवत्ता परीक्षण में कोई कमी नहीं थी तो इस क्षति के लिए जिम्मेदार कौन है?

भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की चर्चा तेज
घटना के बाद लोगों के बीच निर्माण कार्य में कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की चर्चा भी तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि बिहार में पुलों और सड़कों के निर्माण के बाद उनके क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, जिससे सरकारी परियोजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आम जनता के बीच यह चर्चा जरूर है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ हुआ होता तो इतनी जल्दी ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

कौन है जिम्मेदार?
अब जिले के लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी है। जनता जानना चाहती है कि—
* निर्माण एजेंसी कौन थी?
* कार्य की तकनीकी निगरानी किस विभाग ने की?
* गुणवत्ता परीक्षण किस स्तर पर हुआ?
* उद्घाटन या संचालन की अनुमति किसके द्वारा दी गई?
* क्षति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी पर क्या कार्रवाई होगी?

जनता मांग रही निष्पक्ष जांच
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में जनता के पैसे से बनने वाली परियोजनाओं में ऐसी अनियमितताएं दोबारा न हों।

जनता का सीधा सवाल
“जब उद्घाटन का श्रेय लेने के लिए सब आगे थे, तो अब जवाबदेही तय करने के लिए कौन आगे आएगा?”

इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज की यह घटना सिर्फ एक निर्माण कार्य की खामी नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि जनता के इन सवालों का जवाब कैसे देते हैं।

 

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