शिक्षकों के सम्मान से समाज में मजबूत होता है ज्ञान और संस्कार का आधार
बक्सर में दिव्य भारत ट्रस्ट एवं महिला अधिकार इकाई ‘माई’ के तत्वावधान में भव्य शिक्षक रत्न सम्मान समारोह, शिक्षा के बदलते स्वरूप और शिक्षक की भूमिका पर हुआ मंथन


न्यूज़ विज़न। बक्सर
दिव्य भारत ट्रस्ट के सौजन्य एवं महिला अधिकार इकाई (माई) के आयोजन में रविवार को कलेक्टरियट रोड, बक्सर स्थित परिसर में ‘शिक्षक रत्न सम्मान समारोह’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों के योगदान, शिक्षण पद्धति में हो रहे बदलाव, तकनीक के बढ़ते प्रभाव और समाज निर्माण में शिक्षक की भूमिका को लेकर विस्तार से चर्चा-परिचर्चा हुई। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के साथ संस्था के सदस्यों एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री भगवान पाण्डेय ने की, जबकि मंच का संचालन ई० अरुण कुमार ओझा ने किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. एस. एन. चतुर्वेदी, डॉ. एस. एन. सिंह, श्री विष्णुदेव तिवारी, श्रीमती एकता त्रिवेदी, श्री अजय मिश्रा एवं श्री राघवेन्द्र मिश्रा उपस्थित रहे। समारोह के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, समर्पण, नवाचार एवं सामाजिक सरोकार के लिए डॉ. रास बिहारी शर्मा, श्रीमती एकता त्रिवेदी, श्री प्रमोद चौबे, श्री टी. के. पाल, श्री एहतेशाम अंसारी, सुश्री शाक्षी उपाध्याय, श्री बिपिन कुमार एवं श्री अखिलेश दुबे को ‘शिक्षक रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों के योगदान की अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने सराहना की।
‘शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं’
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. एस. एन. सिंह ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। शिक्षक विद्यार्थियों में संस्कार, विवेक और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि एक श्रेष्ठ शिक्षक अपने विद्यार्थियों के साथ-साथ पूरे समाज को दिशा देने का कार्य करता है। वहीं श्री विष्णुदेव तिवारी ने कहा कि शिक्षा समाज में परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। शिक्षक जितना जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार होगा, आने वाली पीढ़ी उतनी ही बेहतर दिशा में आगे बढ़ेगी। उन्होंने शिक्षकों से बदलते समय के साथ स्वयं को अपडेट करते हुए विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धति अपनाने का आह्वान किया।
‘शिक्षक का सम्मान भविष्य निर्माण का सम्मान’
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री भगवान पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक का सम्मान वास्तव में ज्ञान, संस्कार और भविष्य निर्माण का सम्मान है। शिक्षक रत्न जैसे आयोजन समाज में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के समर्पण और उनके योगदान को सम्मानित करने से शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वालों का उत्साह बढ़ता है। समारोह के दौरान वक्ताओं ने शिक्षण पद्धति में हो रहे बदलाव, आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान दौर में शिक्षक की भूमिका पहले से कहीं अधिक व्यापक हो गई है। विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देने के बजाय उन्हें व्यवहारिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना भी आवश्यक है।
बड़ी संख्या में संस्था के सदस्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में महिला अधिकार इकाई (माई) की जिला अध्यक्षा श्रीमती मीरा सिंह के साथ रविता सिंह, सुमन दुबे, चंदा चौरसिया, कुमकुम देवी, दीक्षा स्वार्निका, गोलू दुबे, समीर तिवारी, कृष्णा पाल, रितेश चंद्रवंशी एवं रुपेश चौरसिया सहित बड़ी संख्या में संस्था के सदस्य एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह का वातावरण आत्मीय और उत्साहपूर्ण रहा। उपस्थित अतिथियों एवं सदस्यों ने सम्मानित शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने तथा समाज में ज्ञान, संस्कार एवं जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। अंत में आयोजक संस्था की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों, संस्था के सदस्यों एवं उपस्थित गणमान्य लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।





