गरमा फसल की बुवाई का निकलता जा रहा समय, नहीं आया बीज
गरमा फसल के बीज के लिए 6894 किसानों ने किया है ऑनलाइन आवेदन


न्यूज विजन। बक्सर
जिले में रबी फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है। किसान खाली खेत का उपयोग करते हुए मूंग, हाईब्रिड मक्का और उरद की बुवाई कर सकते हैं। मूंग और उरद की खेती कर किसान दोहरा लाभ प्राप्त करते हैं। मिट्टी को उर्वरा बनाने के लिए इन फसलों को हरी खाद के रूप में उपयोग करते हैं। लेकिन, इस वर्ष उनकी उम्मीद पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। वजह यह है कि गरमा फसल की बुवाई का समय धीरे-धीरे निकलता जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से किसानों किसानों को अब तक बीज उपलब्ध नहीं कराया गया है।अनुदानित बीज नहीं मिलने से किसान बाजार से महंगे दाम पर खरीदने को विवश हो गये हैं।
जिला कृषि विभाग के सूत्र बताते हैं कि गरमा फसल के बीज के लिए 6894 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। बता दें कि प्राप्त लक्ष्य के अनुसार कृषि विभाग की ओर से कुल 60 क्विंटल हाइब्रिड मक्का, 185 क्विंटल उरद तथा 640 क्विंटल मूंग का बीज अनुदानित दर पर वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन, आज तक जिले में किसी फसल का एक छटाक बीज भी उपलब्ध नहीं है। बुआई का सही समय निकलने से उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कृषि विभाग की ओर से अनुदानित दर पर मिलने वाले गरमा फसल बीज का इंतजार करते रहे गये। जिला कृषि विभाग को बीते 18 अप्रैल तक मूंग, उरद और हाईब्रिड मक्का का बीज अप्राप्त है। किसानों की मानें तो समय पर बीज नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन बाजार से ऊंचे दाम पर बीज खरीदना पड़ रहा है। इस वजह से लागत बढ़ गई है। कई किसानों ने बताया कि अगर समय पर अनुदानित बीज मिल जाता तो उन्हें आर्थिक राहत के साथ बेहतर उत्पादन भी मिलता।
क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी:
जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि बीज आपूर्ति की प्रक्रिया चल रही है। कृषि विभाग द्वारा अनुदानित बीज उपलब्ध नहीं हो सका है। जिले गरमा फसल का बीज उपलब्ध होते ही किसानों के बीच वितरण कर दिया जाएगा।
कृषि विज्ञान केन्द्र के पादप सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ रामकेवल ने बताया कि गरमा फसलों की बुवाई का सही समय फरवरी और मार्च का माह होता है। अधिक से अधिक अप्रैल का पहला सप्ताह तक बुवाई कर सकते हैं। इससे अधिक विलंब होने पर मूंग-उरद फसल में फली कम या ना के बराबर निकलते हैं। क्योंकि फूल निकलने के समय तापमान बढ़ने की स्थिति में भारी कमी आ सकती है।





