बनारपुर में गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो’, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन, बाल स्वरूप की झांकी ने मोहा मन; भजन-कीर्तन और जयघोष से कृष्णमय हुआ कथा स्थल

न्यूज़ विज़न। बक्सर
प्रखंड क्षेत्र के बनारपुर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास आचार्य रणधीर ओझा जी ने भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की कथा का अत्यंत भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी दिव्य लीलाओं से जुड़े प्रसंगों का रसपान कराया।
कथा के दौरान देवकी और वसुदेव के विवाह, कंस के अत्याचार, देवकी की संतानों की हत्या तथा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्राकट्य का विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य रणधीर ओझा ने कहा कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार और अन्याय बढ़ गया तथा धर्म की हानि होने लगी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के गर्भ से अवतार लेकर अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का संकल्प लिया। जैसे ही कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और प्राकट्य का प्रसंग सुनाया, कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। पूरा परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ कृष्ण जन्मोत्सव में सहभागिता की। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आकर्षक झांकी ने भी उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
वसुदेव का गोकुल पहुंचना बना भावपूर्ण प्रसंग
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद वसुदेव जी द्वारा नन्हे कृष्ण को लेकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचने के प्रसंग का भी अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। आचार्य जी ने बताया कि भगवान की लीला में प्रकृति भी सहयोगी बन जाती है। वसुदेव जी जब बाल कृष्ण को लेकर यमुना पार कर रहे थे, तब यमुना जी ने भी भगवान के चरण स्पर्श कर उनकी दिव्यता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि अंधकार के बीच प्रकाश के प्रकट होने का प्रतीक है। जब मनुष्य के जीवन में मोह, अहंकार, भय और निराशा का अंधकार बढ़ता है, तब भगवान का स्मरण उसके भीतर ज्ञान, प्रेम, विश्वास और आशा का प्रकाश उत्पन्न करता है।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण के जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल उनकी बाल लीलाओं और चमत्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानव जीवन के लिए गहरे संदेश निहित हैं। प्रेम, करुणा, धर्म, कर्म और सत्य के प्रति समर्पण श्रीकृष्ण के जीवन की प्रमुख शिक्षाएं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि कृष्ण जन्मोत्सव की खुशी तभी सार्थक होगी, जब हम भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, सत्य, धर्म और कर्म के संदेश को अपने जीवन में आत्मसात करें।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजन-कीर्तन, धार्मिक जयघोष और श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं के कारण पूरा कथा स्थल भक्तिमय बना रहा। आयोजन के मुख्य आयोजक राधे श्याम तिवारी एवं मुख्य संयोजक आलोक तिवारी ने कथा में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया और आगामी कथा में भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।




