संग्रहालय भ्रमण से बच्चों ने जानी विरासत की कहानी, इतिहास और संस्कृति से रूबरू हुए 100 छात्र-छात्राएं
जयपुरिया स्कूल डुमरांव के सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने सीताराम उपाध्याय संग्रहालय का किया शैक्षणिक भ्रमण, डॉ. सुधा सिंह ने विरासत संरक्षण के प्रति किया जागरूक


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहर स्थित सीताराम उपाध्याय संग्रहालय, बक्सर में जयपुरिया स्कूल, डुमरांव के सातवीं कक्षा के लगभग 100 छात्र-छात्राओं एवं उनके शिक्षकों ने शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने संग्रहालय में संरक्षित विभिन्न ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक वस्तुओं को नजदीक से देखा और उनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
भ्रमण के दौरान सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. सुधा सिंह ने छात्र-छात्राओं को संग्रहालय की उपयोगिता तथा ऐतिहासिक विरासत के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि “हमारी विरासत ही हमारी पहचान है।” उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और देश की संस्कृति, इतिहास तथा पुरातत्व को समझने के लिए अपनी विरासत से जुड़ाव बेहद जरूरी है। डॉ. सुधा सिंह ने विद्यार्थियों को समझाया कि किताबों में पढ़े गए इतिहास को जब प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा जाता है, तो उसका ज्ञान और अधिक प्रभावी एवं स्थायी बनता है। उन्होंने कहा कि किताबों में पढ़ी गई ऐतिहासिक घटनाओं और तथ्यों के स्रोतों को प्रत्यक्ष रूप से देखने-समझने के लिए संग्रहालय सबसे उपयुक्त स्थानों में से एक है।
इस दौरान संग्रहालय में संग्रहित विभिन्न ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक वस्तुओं के बारे में विद्यार्थियों को विस्तार से जानकारी दी गई। छात्र-छात्राओं ने भी संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुओं को उत्सुकता के साथ देखा और उनके इतिहास एवं महत्व से जुड़े सवाल पूछे। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान प्राप्त जानकारी को अपने अध्ययन से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। संग्रहालय भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रत्यक्ष रूप से देखकर बच्चों को अपने क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला। इस अवसर पर बच्चों को अपनी संस्कृति, इतिहास और पुरातत्व के प्रति जागरूक रहने तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने के लिए भी प्रेरित किया गया। शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि विरासत केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत भी है।





