बक्सर से डुमरांव तक पर्यावरण, अंगदान और नेत्रदान का जनजागरण, पदयात्रा के दूसरे दिन शहीदों को नमन कर सैकड़ों पौधे लगाए
चिलहरी से पुराना भोजपुर होते हुए डुमरांव पहुंची जागरूकता पदयात्रा, विचार गोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, अंगदान, देहदान और नेत्रदान को बताया मानवता की सबसे बड़ी सेवा


न्यूज़ विज़न। बक्सर
पर्यावरण संरक्षण, अंगदान, देहदान और नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से बक्सर की ऐतिहासिक नगरी से शहीदों की धरती डुमरांव तक निकाली जा रही जनजागरण पदयात्रा का दूसरा दिन उत्साह और जनसहभागिता के साथ संपन्न हुआ। दूसरे दिन पदयात्रा की शुरुआत उच्च विद्यालय चिलहरी से हुई। इसके बाद पदयात्री गोपालडेरा और नवाडेरा होते हुए पुराना भोजपुर पहुंचे, जहां मध्य विद्यालय पुराना भोजपुर परिसर में पांच पौधों का रोपण किया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरेराम राम ने सभी पदयात्रियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
इसके बाद पदयात्रियों का कारवां डुमरांव शहर में प्रवेश किया। दधीचि देहदान समिति, बक्सर, आसा पर्यावरण सुरक्षा बिहार, शिका फाउंडेशन ट्रस्ट बक्सर, भारत ज्ञान विज्ञान समिति तथा पीपल-नीम-तुलसी अभियान, पटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पदयात्रा के दौरान सभी प्रतिभागियों ने 1942 के अमर स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। डुमरांव स्थित महारानी उषारानी प्लस टू उच्च विद्यालय में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका संचालन आसा पर्यावरण सुरक्षा बिहार के राज्य संयोजक विपिन कुमार ने किया। कार्यक्रम के दौरान पदयात्रा में शामिल सभी पदयात्रियों को दधीचि देहदान समिति की अध्यक्ष एवं नगर परिषद बक्सर की पूर्व चेयरमैन मीना सिंह, पीपल-नीम-तुलसी अभियान के संस्थापक डॉ. धर्मेंद्र तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति की सचिव अनीता यादव के हाथों प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि यह पदयात्रा का दूसरा चरण है, जिसमें अब तक सैकड़ों पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का अगला चरण बक्सर से पटना तक आयोजित किया जाएगा, जिसकी तैयारी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी।
पूर्व चेयरमैन मीना सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को इस धरती पर स्वस्थ और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग अंगदान, देहदान और नेत्रदान का संकल्प लें, ताकि जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई रोशनी और नई उम्मीद लाई जा सके। पीपल-नीम-तुलसी अभियान के संस्थापक डॉ. धर्मेंद्र ने पर्यावरण संरक्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार गिरता जलस्तर और बदलती जलवायु भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने लोगों से सावन के पावन महीने में धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति धर्म निभाने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लोग भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करते हैं, उसी प्रकार पेड़-पौधों को भी जल देकर उनके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। मुजफ्फरपुर से आए प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार सुनील जी ने अपनी प्रस्तुति और गीतों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण तथा नेत्रदान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमें अनमोल आंखें दी हैं। जिन लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है, उनके जीवन में नेत्रदान के माध्यम से फिर से उजाला लाया जा सकता है। इसलिए नेत्रदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।
कार्यक्रम के अंत में शिका फाउंडेशन ट्रस्ट के विवेक कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि अंगदान वास्तव में महादान है। यदि कोई व्यक्ति अपने अंगों का दान करता है तो वह किसी जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद और नया जीवन प्रदान कर सकता है। इस अवसर पर भारत ज्ञान विज्ञान समिति की सचिव अनीता यादव, पीपल-नीम-तुलसी अभियान के डॉ. धर्मेंद्र, कठपुतली कलाकार सुनील सरला, विक्रम जयनारायण निषाद, रमाकांत राम, अखिलेश्वर प्रसाद, पृथ्वीनाथ सिंह, डॉ. सुरेंद्र कुमार सिंह, दिलीप कुमार, हरेंद्र कुमार, अजय कुमार, निर्मल प्रसाद, रमेश चंद्र, इंद्रजीत वर्मा, राजकुमार सिंह, बबन सिंह, विकास कुमार, शांतनु कुमार, ब्रजेश कुमार, शालिग्राम पाल, नीलम श्रीवास्तव, सुरेंद्र प्रताप सिंह, शमशाद खान, रघुकुल तिलक, चंदन कुमार सिंह, विजय लाल शर्मा, उर्मिला कुमारी, सुनीता कुमारी, ऊषा कुमारी, ऊषा मिश्रा, संगीता कुमारी, आनंद प्रकाश, नवनीत कुमार, हरेराम सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
यह पदयात्रा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अंगदान, देहदान और नेत्रदान जैसे मानवीय अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। आयोजकों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा, ताकि समाज में पर्यावरण और मानव सेवा के प्रति जागरूकता का मजबूत संदेश पहुंच सके।





