बक्सर आरओबी क्षतिग्रस्त मामले में प्रशासन द्वारा संवेदक पर एफआईआर, हो सकता है 5 से 6 साल तक की सजा
डीएम के निर्देश पर पुल निगम के कनीय अभियंता ने दर्ज कराई प्राथमिकी, निर्माण में लापरवाही से सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में डालने का आरोप


न्यूज़ विज़न। बक्सर
बक्सर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के क्षतिग्रस्त होने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निर्माण एजेंसी के संवेदक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर लगातार जिला प्रशासन को ट्रोल किए जाने और पुल की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच डीएम साहिल के निर्देश पर बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के कनीय अभियंता एवं प्रमंडल प्रतिनिधि हरेराम राम ने मुफस्सिल थाना में एफआईआर दर्ज कराई है।
दर्ज प्राथमिकी में सासाराम (रोहतास) के करवंदिया थाना क्षेत्र के वनसा निवासी संवेदक प्रमोद कुमार सिंह पर निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार आरओबी के एक्सपेंशन जॉइंट के समीप स्थित कंक्रीट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आम लोगों के जान-माल को खतरा उत्पन्न हो सकता था। प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 290 एवं 326(बी) के तहत दर्ज की गई है। ये धाराएं सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने तथा किसी निर्माण के निर्माण, मरम्मत या गिराने के दौरान बरती गई लापरवाही से संबंधित हैं। इन अपराधों में दोष सिद्ध होने पर पांच से छह वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है, हालांकि ये जमानतीय धाराएं हैं।
आरओबी के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आने के बाद जिले में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठे थे। सोशल मीडिया पर भी जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी की कार्यशैली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार संवेदक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब इस मामले में पुलिस जांच करेगी और निर्माण कार्य में हुई कथित लापरवाही तथा उसकी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।





