जल-जीवन-हरियाली अभियान को ठेंगा! सार्वजनिक कुआं भरकर कर दिया समतल
बक्सर के धेनुआडीह गांव में प्राचीन ‘बुढ़वा कुआं’ भरने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप, सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन से डीएम से जांच और कार्रवाई की मांग

न्यूज़ विज़न। बक्सर
जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण के उद्देश्य से बिहार सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान के बीच बक्सर जिले के केसठ प्रखंड अंतर्गत धेनुआडीह गांव से सार्वजनिक कुएं को भरकर समतल किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के प्राचीन और सार्वजनिक उपयोग वाले ‘बुढ़वा कुआं’ को रातों-रात भरकर समतल कर दिया गया। ग्रामीणों ने इस मामले को जल संरक्षण की सरकारी मुहिम के उद्देश्यों के विपरीत बताते हुए जिलाधिकारी को सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर जांच एवं उचित कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, बिहार सरकार ने वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जल-जीवन-हरियाली मिशन की शुरुआत की थी। इसके तहत तालाब, पोखर, आहर, पाइन और सार्वजनिक कुओं जैसे पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वर्षा जल का संचयन हो सके और जल संकट से निपटने के साथ पर्यावरणीय संतुलन कायम रखा जा सके। लेकिन धेनुआडीह गांव में ग्रामीणों का दावा है कि जिस सार्वजनिक कुएं का पूर्व में जीर्णोद्धार भी कराया गया था, उसी ‘बुढ़वा कुआं’ को भरकर उसका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कुआं केवल पानी का स्रोत नहीं था, बल्कि गांव के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन से भी जुड़ा हुआ था। सिंचाई के साथ-साथ शादी-विवाह और विभिन्न पूजा-पाठ की रस्मों में भी इसका उपयोग किया जाता था।
ग्रामीणों ने लगाया अतिक्रमण का आरोप
डीएम को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के ही रामकुमार यादव, पिता स्वर्गीय रामाधार यादव द्वारा कथित तौर पर कुएं की बाउंड्री को तोड़कर कुएं को भर दिया गया और जमीन को समतल करने के बाद पक्कीकरण किए जाने की प्रक्रिया की जा रही है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कुएं से जुड़ी जमीन के हिस्से पर पहले से ही अतिक्रमण किया गया था और अब पूरे कुएं को ही भर दिया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि सार्वजनिक जलस्रोत को किस परिस्थिति में भरा गया और संबंधित भूमि की स्थिति क्या है। ग्रामीणों ने कुएं को पूर्व अवस्था में लाने तथा उसका दोबारा जीर्णोद्धार कराने की भी मांग की है।
विरोध करने पर विवाद का भी आरोप
आवेदन में ग्रामीणों ने संबंधित व्यक्ति पर दबंग प्रवृत्ति का आरोप लगाते हुए कहा है कि कुएं को भरने का विरोध करने पर विवाद और झगड़े की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के साथ-साथ गांव में शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
गली पर भी अतिक्रमण का आरोप
ग्रामीणों ने अपने आवेदन में केवल बुढ़वा कुआं ही नहीं, बल्कि गांव के अंदर की गली के कथित अतिक्रमण का भी मुद्दा उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ते की स्थिति की भी जांच कराकर अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो।
सैकड़ों ग्रामीणों ने हस्ताक्षर कर डीएम से लगाई गुहार
इस मामले को लेकर ग्रामीणों द्वारा सामूहिक रूप से जिलाधिकारी को आवेदन दिया गया है, जिस पर सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षर होने की बात कही गई है। आवेदन में ओंकारनाथ सिंह, संजय सिंह, भुवर सिंह, रवि कुमार, विमलेश यादव, रीता देवी, गोरख कुमार, सोनू कुमार, श्यामनाथ यादव, भूखंड लाल, राजेंद्र यादव, कविंद्र यादव, लाल जी यादव समेत अनेक ग्रामीणों के नाम शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जहां जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से पुराने जलस्रोतों को बचाने और उनका जीर्णोद्धार करने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं धेनुआडीह में कथित तौर पर एक प्राचीन सार्वजनिक कुएं को ही भरकर उसका अस्तित्व समाप्त कर दिया गया। ऐसे में प्रशासन द्वारा मामले की स्थल जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कुएं की भूमि एवं उसके सार्वजनिक स्वरूप का सत्यापन कराया जाए, कथित अतिक्रमण की जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्राचीन ‘बुढ़वा कुआं’ को पुनः संरक्षित एवं जीर्णोद्धारित कराया जाए।




