मुख्यमंत्री के आगमन के पूर्व नाबालिग छात्राओं से यौन शोषण मामले के आरोपी दोनों शिक्षक नौकरी से बर्खास्त
नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय से जुड़े मामले में विभागीय जांच पूरी होने के बाद शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, नियम 14(XI) के तहत बीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार बर्खास्त, भविष्य में भी सरकारी सेवा का रास्ता बंद


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले के डुमरांव प्रखंड क्षेत्र स्थित नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय से जुड़े नाबालिग छात्राओं के कथित यौन शोषण के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद आरोपी शिक्षक बीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्तगी के साथ ही दोनों की सरकारी नौकरी समाप्त हो गई है। विभागीय कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(XI) के तहत की गई है। इसके तहत भविष्य में सरकारी सेवा के लिए उनकी पात्रता भी समाप्त हो जाएगी।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई उस समय सामने आई है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बक्सर दौरे से पहले इस चर्चित मामले में प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई को लेकर नजरें टिकी हुई थीं। मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षकों को निलंबित करते हुए विभागीय जांच शुरू की थी। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब विभाग ने दोनों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की है।
शिकायत के बाद शुरू हुआ था कार्रवाई का सिलसिला
नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय से जुड़े इस मामले में नाबालिग छात्राओं के साथ कथित आपत्तिजनक व्यवहार, वीडियो बनाए जाने और उसके वायरल होने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। शिकायत मिलने के बाद मामला पुलिस और शिक्षा विभाग तक पहुंचा। शिक्षा विभाग की ओर से 2 सितंबर को अरविंद कुमार और बीरेंद्र प्रसाद के निलंबन की कार्रवाई की गई थी। इसके अगले दिन विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भी जांच के लिए विशेष टीम गठित की। आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की ओर से लगातार दबिश दी गई। कार्रवाई के दौरान प्रधानाध्यापक समेत अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी हुई। बाद में फरार चल रहे शिक्षक बीरेंद्र प्रसाद को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया।
जेल में बंद शिक्षकों से मांगा गया था स्पष्टीकरण
घटना के बाद जिला पदाधिकारी साहिला के निर्देश पर विशेष टीम गठित कर विभागीय जांच कराई गई। जांच के दौरान जेल में बंद दोनों आरोपी शिक्षकों से विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगा गया। जेलर के माध्यम से दोनों शिक्षकों का स्पष्टीकरण जांच अधिकारियों तक पहुंचाया गया। हालांकि, विभाग ने दोनों की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद विभागीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए दोनों शिक्षकों के विरुद्ध सेवा से बर्खास्तगी का निर्णय लिया गया। कार्रवाई के तहत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा को उपस्थापन पदाधिकारी तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सर्व शिक्षा अभियान को संचालन पदाधिकारी बनाया गया था।
सरकारी सेवा से बर्खास्तगी के साथ भविष्य की नौकरी पर भी असर
विभागीय कार्रवाई के बाद अब दोनों शिक्षकों की सरकारी सेवा समाप्त हो गई है। नियम 14(XI) के तहत हुई इस कार्रवाई का प्रभाव भविष्य में सरकारी सेवा में नियुक्ति की पात्रता पर भी पड़ेगा। यानी बर्खास्तगी के बाद दोनों के लिए किसी अन्य सरकारी नौकरी में नियुक्ति का रास्ता भी बंद हो जाएगा।
आपराधिक मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी
इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से विभागीय कार्रवाई पूरी करते हुए दोनों शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। हालांकि, मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं है। पुलिस की जांच और गिरफ्तारी के बाद आपराधिक मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, जिसका अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। नथुनी अहीर के डेरा मध्य विद्यालय से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षकों की जवाबदेही और संस्थागत निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि आरोपों की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने मामले में कड़ा कदम उठाया है। अब आपराधिक मामले में न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर भी नजर बनी हुई है।





