पटना में सिंचाई विभाग के वरीय लेखा लिपिक सत्यनारायण सिंह का निधन, समाजसेवा और संघर्षशील जीवन की छोड़ गए अमिट छाप
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट पंकज राजशेखर सिंह के पिता थे स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह, सामाजिक सरोकारों और गरीबों की सेवा के लिए थे प्रसिद्ध


न्यूज़ विज़न। बक्सर
अत्यंत दुःख और शोक के साथ यह सूचना प्राप्त हुई कि सिंचाई विभाग में वरीय लेखा लिपिक के पद पर कार्यरत रहे स्वर्गीय श्री सत्यनारायण Singh का गुरुवार 15 मई 2026 की संध्या लगभग 7 बजे पटना स्थित Ruban Memorial Hospital में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों एवं समाज में शोक की लहर दौड़ गई।
स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट पंकज राजशेखर सिंह के पूज्य पिता थे। वे अपने सरल स्वभाव, संवेदनशील सोच, संघर्षशील व्यक्तित्व और समाजसेवा के लिए व्यापक रूप से जाने जाते थे। बताया जाता है कि स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह हमेशा गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। समाज के पीड़ित और शोषित वर्ग के प्रति उनके मन में विशेष संवेदना थी। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और वैचारिक आंदोलनों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा लंबे समय तक वामपंथी विचारधारा से प्रेरित संगठनों के साथ कार्य करते हुए अन्याय, शोषण और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाते रहे।
उन्होंने अपने पूरे जीवन में सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को सर्वोपरि रखा। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मेहनत, ईमानदारी, कर्मठता और आत्मविश्वास के बल पर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके व्यक्तित्व में संघर्ष और सामाजिक समर्पण की अद्भुत झलक दिखाई देती थी। स्वर्गीय सत्यनारायण सिंह का जीवन केवल सरकारी सेवा तक सीमित नहीं था, बल्कि वे जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी हमेशा सक्रिय रहे। वे हर परिस्थिति में कमजोर और जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े दिखाई देते थे। यही कारण है कि उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके निधन पर विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि समाज ने एक ईमानदार, संवेदनशील और जनहित के लिए समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है। ईश्वर से प्रार्थना की गई कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।





