OTHERS

धान की सीधी बुवाई कम लागत में बंपर पैदावार पाने का बेहतर विकल्प: डॉ देवकरन

जलवायु परिवर्तन, मजूदरों की कमी और अधिक लागत के बोझ से मुक्ति पाने के लिए धान की करें सीधी बुवाई

न्यूज विजन। बक्सर

सिंचाई के लिए पानी की कमी, जलवायु परिवर्तन, मजूदरों की कमी और अधिक लागत के बोझ से मुक्ति पाने के लिए धान की सीधी बुवाई करें। धान की खेती में बिचड़ा डालने से लेकर कटनी तक खर्च ही खर्च है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ देवकरन ने बताया कि धान की खेती में गिरते भू-जल स्तर, लागत खर्च आदि से बचने के लिए वैज्ञानिक विधि से धान की सीधी बुआई करें। इसमें कम लागत में ससमय बेहतर उपज मिलता है। उन्होंने कहा कि यह धान बोने की पुरानी विधि है। जिसे वैज्ञानिक तरीके से बोने पर खेत में कम लागत में समय पर बुआई बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

 

 

डॉ देवकरन ने कहा कि इस तकनीक में खेत में नमी बनाकर सीडड्रील द्वारा बुआई की जाती है। अगर खेत में खरपतवार अधिक उगते हो तो जून के प्रथम सप्ताह में पटवन कर खरपतवार उगा लिया जाता है और उसके बाद जुताई कर नमी की अवस्था में सीडड्रील द्वारा धान की सीधी बुआई कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में महीन धान की प्रजाति के लिए 12 किलो तथा मोटे आकार की प्रजाति के लिए 15 किलो बीज बुआई के लिए प्रयाप्त है। उन्होंने बताया कि लंबे अवधि की प्रजाति एमटीयू-7029, बीपीटी-5204 की बुवाई के लिए 20 मई और मध्यम प्रजाति राजेन्द्र श्वेता, राजेन्द्र कस्तूरी, सवर्न श्रेया, सवर्न समृद्धि की बुवाई 30 जून तक उपर्युक्त समय है।

 

 

धान की सीधी बुआई कर किसान प्रति एकड़ पांच हजार रुपये की बचत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुआई कर प्रति एकड़ रोपाई का खर्च करीब 25 सौ रुपये तथा कादो के खर्च में लगभग 25 सौ रुपये की बचत की जा सकती है। प्रति एकड़ पांच हजार की बचत से किसानों को राहत मिलेगी। धान की खेती में लागत खर्च कम होने से जाहिर सी बात है कि किसानों को अच्छा मुनाफा होगा।

 

 

कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ ने बताया कि सीधी बुआई में खेतों में खरपतवार उगने की समस्या आती है। खरपतवार प्रबंधन के लिए बीसपारीबैक सोडियम 10 प्रतिशत ईसी नामक रसायन की 80 एमएल मात्रा प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि खेत में संतुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग करें। प्रति एकड़ 20 किलोग्राम फास्फोरस तथा 10 किलोग्राम पोटाश उर्वरक देना चाहिए। वहीं यूरिया फसल उगने पर सिंचाई के बाद आवश्यकतानुसार संतुलित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए। बुआई के पैंतीस से चालीस दिन पर एक बार हाथ से खरपतवार निकाल लें। उन्होंने बताया कि जहां पर पानी की सुनिश्चितता हो वहीं पर धान की सीधी बुआई उपयुक्त होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button