महाशक्ति कालरात्रि नवदुर्गा धाम महदह में उमड़ा आस्था का सैलाब, पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ महायज्ञ संपन्न
इटाढ़ी पुलिस लाइन के समीप महदह स्थित धाम में छह दिवसीय श्री राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा एवं श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ महामहोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग, कथा-रासलीला और रामलीला से भक्तिमय बना पूरा क्षेत्र


न्यूज़ विज़न। बक्सर
बक्सर जिले के इटाढ़ी पुलिस लाइन परिसर के समीप महदह स्थित महाशक्ति कालरात्रि नवदुर्गा धाम में रविवार को आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। महाशक्ति कालरात्रि नवदुर्गा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में 5 से 10 मई तक आयोजित श्री राधा-कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा एवं श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ महामहोत्सव का समापन पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गया।
छह दिनों तक चले इस धार्मिक महोत्सव में जिले समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। समापन अवसर पर श्रीरामजानकी आश्रम के महंत राजाराम शरण दास भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए धर्म और सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। महाशक्ति कालरात्रि नवदुर्गा धाम के पीठाधीश्वर द्वारिका दास महाराज ने बताया कि महोत्सव की शुरुआत 5 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई थी। इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए थे। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण और जयकारों की गूंज सुनाई दी। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रासलीला का मंचन हुआ, जबकि शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। वहीं रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक रामलीला का मंचन कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया गया।
इस धार्मिक आयोजन का मुख्य आकर्षण लक्ष्मीनारायण त्रिदण्डी स्वामी महाराज के श्रीमुख से होने वाला श्रीमद्भागवत कथा वाचन रहा। कथा सुनने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे। वहीं हरिद्वार से आए अमित भारद्वाज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से महायज्ञ का संचालन किया। महोत्सव के अंतिम दिन पूर्णाहुति के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। स्थानीय लोगों ने भी इस धार्मिक आयोजन को ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बताया।





