7-8 माह से भुगतान नहीं, आशा कार्यकर्ताओं में नाराजगी
23 सूत्री मांगों को लेकर आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ का प्रतिनिधिमंडल सिविल सर्जन से मिला, वेतन-पेंशन और बकाया भुगतान की उठाई मांग


न्यूज़ विज़न। बक्सर
आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ की राज्य शाखा द्वारा लिए गए निर्णय के आलोक में सोमवार को बक्सर में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचकर अपनी 23 सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। आचार संहिता लागू होने के कारण जिले में प्रदर्शन नहीं किया गया, बल्कि शिष्टमंडल के माध्यम से अपनी मांगों को कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति पटना तक पहुंचाने का आग्रह किया गया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संघ के जिला संयोजक सह राज्य उपाध्यक्ष अरुण कुमार ओझा ने किया। इस दौरान उन्होंने सिविल सर्जन से विशेष आग्रह करते हुए कहा कि जिले की आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को पिछले 7 से 8 माह से किसी भी प्रकार की प्रोत्साहन एवं पारितोषिक राशि का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने विभागीय स्तर पर पहल कर जल्द भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की। संघ नेताओं ने बताया कि आवंटन वितरण एवं भुगतान प्रक्रिया में भारी अनियमितता है। एक ही जिले में किसी प्रखंड को दिसंबर माह तक की राशि मिल चुकी है, जबकि कई प्रखंडों को एक माह का भी भुगतान नहीं मिला है। इसे लेकर कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।7-8-months-to-pay-no-hope-car
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि आशा फैसिलिटेटरों से पूरे महीने कार्य लिया जाता है, लेकिन यात्रा भत्ता केवल 21 दिनों का दिया जाता है। इसे बढ़ाकर 30 दिनों का किया जाए। साथ ही आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका की तर्ज पर आशा कार्यकर्ताओं की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित करने की मांग भी उठाई गई। संघ ने आशा कार्यक्षेत्र में जीविका समूहों को भेजकर कार्य कराने की प्रथा पर रोक लगाने की मांग की। इसके अलावा लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाली आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को निर्वाचन अवधि की बकाया राशि का भुगतान कराने की भी मांग रखी गई। ज्ञापन में आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों के लिए ₹10 लाख रिटायरमेंट बेनिफिट और ₹10 हजार मासिक पेंशन लागू करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही। संघ ने मुख्यमंत्री द्वारा घोषित ₹2000 पारितोषिक राशि का एकमुश्त भुगतान सीधे खातों में भेजने की भी मांग की।
संघ नेताओं ने कहा कि आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को प्रोत्साहन राशि के बजाय ₹26 हजार प्रतिमाह निश्चित वेतन दिया जाए तथा पेंशन, ग्रेच्युटी, पीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ श्रम संगठन की अनुशंसा के अनुरूप लागू किए जाएं। साथ ही लेबर कोर्ट के प्रावधानों को समाप्त कर आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को श्रम कानूनों के दायरे में लाने की मांग भी रखी गई। शिष्टमंडल में डैजी देवी, नीतू पांडेय, सरस्वती देवी, बेबी देवी, ममता, धर्मशिला, रिंकी, महाबीर पंडित, हरेराम सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।





