RELIGION

अटाव गांव हुआ बुद्धमय: बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा आस्था का सागर, रातभर गूंजे भजन

सम्राट अशोक क्लब ग्रामीण इकाई के आयोजन में जनसैलाब, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने बढ़ाया कार्यक्रम का गौरव

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बक्सर जिले के लटवा अटाव गांव में इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव को लेकर अभूतपूर्व उत्साह और भव्यता देखने को मिली। सम्राट अशोक क्लब ग्रामीण इकाई के तत्वावधान में 1 मई, शुक्रवार को आयोजित इस महोत्सव ने पूरे गांव को मानो बुद्धमय बना दिया। हर तरफ भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का माहौल था, जिससे अटाव गांव की पहचान एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरकर सामने आई।

 

कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना और भगवान बुद्ध के स्मरण के साथ की गई। इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उत्पाद अधीक्षक अशरफ जमाल उपस्थित रहे, वहीं उद्घाटनकर्ता के रूप में पूर्व मंत्री सह वर्तमान विधायक संतोष कुमार निराला ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनके साथ गोपालगंज से आए बृजेश कुमार मौर्य ने भी मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच की अध्यक्षता सम्राट अशोक क्लब के जिला अध्यक्ष मनेंद्र सिंह अधिवक्ता ने की, जबकि आयोजन की कमान ग्रामीण इकाई के अध्यक्ष पुदेन्दु मौर्य के हाथों में रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में कोषाध्यक्ष मनोज कुमार मौर्य, सचिव शशिकांत मौर्य, तथा अन्य सक्रिय सदस्यों जैसे मुकेश जी, हंसराज मौर्य, सुदामा सिंह, अजीत सिंह, अरुण मौर्य (प्रबंधक) और अरुण कुमार मौर्य का विशेष योगदान रहा।

 

कार्यक्रम का संचालन संजय मौर्य ने बेहद प्रभावशाली ढंग से किया, जिससे पूरे आयोजन में अनुशासन और ऊर्जा बनी रही। महोत्सव का सबसे आकर्षक पहलू रहा रातभर चला बुद्ध भजन कार्यक्रम, जिसमें स्थानीय कलाकारों और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भक्ति गीतों और बुद्ध वंदना से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस आयोजन को सफल बनाया, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि की झलक साफ दिखाई दी। इस मौके पर वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के विचारों—अहिंसा, करुणा और शांति—को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बुद्ध के सिद्धांत और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, और समाज को एक नई दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।

अटाव गांव में आयोजित यह बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकजुटता और सामूहिक भागीदारी का भी बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब गांव एकजुट होता है, तो वह किसी भी पर्व को ऐतिहासिक बना सकता है। पूरे आयोजन के दौरान गांव का हर कोना श्रद्धा और भक्ति में डूबा नजर आया—सचमुच, अटाव गांव उस दिन पूरी तरह “बुद्धमय” हो गया।

 

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