राष्ट्रीय लोक अदालत में 736 मामलों का निपटारा, करीब दो करोड़ की समझौता राशि पर बनी सहमति
लोक अदालत में बैंक, यातायात, वैवाहिक और आपराधिक मामलों का हुआ समाधान, दिव्यांग बच्चों को भी वितरित किए गए उपहार


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को वर्ष 2026 की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन व्यवहार न्यायालय परिसर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय की निरीक्षी न्यायाधीश न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार काजल झाम्ब, जिला पदाधिकारी साहिला, पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य, जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष बबन ओझा, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय मनोज कुमार प्रथम, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार नेहा दयाल, स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत, मुख्य अधिवक्ता विधिक सहायता प्रतिरक्षा प्रणाली विनय कुमार सिंहा सहित न्यायिक पदाधिकारी एवं अधिवक्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव द्वारा दिव्यांग बच्चों को ट्राई साइकिल, स्कूल बैग एवं अन्य उपहार प्रदान किए गए। समारोह में व्यवहार न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, पारा विधिक स्वयंसेवक तथा न्यायालय कर्मियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
लोक अदालत में एक ही दिन में 736 मामलों का निपटारा
पूर्वाह्न 10 बजे शुरू हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में समाचार लिखे जाने तक कुल 736 मामलों का निष्पादन किया गया। विभिन्न प्रकार के मामलों में पक्षकारों ने आपसी सुलह और समझौते के आधार पर अपने विवादों का समाधान कराया। राष्ट्रीय लोक अदालत में बैंक से संबंधित 294 मामलों का निपटारा हुआ, जिसमें कुल 1 करोड़ 99 लाख 30 हजार 791 रुपये की समझौता राशि पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा यातायात के 160 मामले, आपराधिक प्रकृति के 120 मामले, विद्युत विभाग से जुड़े 143 मामले तथा 19 वैवाहिक मामलों का भी निष्पादन कराया गया।
“लोक अदालत में दोनों पक्षों की होती है जीत” — न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति सोनी श्रीवास्तव ने कहा कि लोक अदालत सुलभ एवं त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम है। यहां किसी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से समाधान निकलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में लोग बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के एक ही दिन में अपने मामलों का निपटारा करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में आने वाले सभी पक्षकारों का स्वागत है और उम्मीद है कि वे आपसी सुलह के आधार पर अपने मामलों का समाधान कराएंगे।
“लोक अदालत जनता की अदालत है” — नेहा दयाल
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश पर राष्ट्रीय लोक अदालत को एक जनपर्व के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार लोग वर्षों तक स्थानीय न्यायालय, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन मामलों का समाधान नहीं हो पाता। ऐसे में लोक अदालत लोगों को सरल, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत पूरी तरह आपसी सहमति पर आधारित व्यवस्था है। दोनों पक्षों की सहमति के बाद अवार्ड तैयार किया जाता है, जिसकी प्रति दोनों पक्षों को दी जाती है तथा एक प्रति न्यायालय में सुरक्षित रखी जाती है।
कई न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ता रहे मौजूद
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उदय प्रताप सिंह, सुदेश कुमार श्रीवास्तव, संजीत कुमार सिंह, अमित कुमार शर्मा, सोनेलाल रजक, कमल कुमार, मानस कुमार वत्सल, अनुपमा सिंह, भोला सिंह, महेश्वर नाथ पांडेय और न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मानवेन्द्र सिंह सहित कई न्यायिक पदाधिकारी विभिन्न पीठों में उपस्थित रहे। इस अवसर पर पैनल अधिवक्ताओं में दीपिका कुमारी केसरी, प्रमिला पाठक, ज्योति शंकर, धर्मेंद्र कुमार, राजीव कुमार मिश्रा, सेवानंद उपाध्याय, पिंकी कुमारी, विष्णु दत्त द्विवेदी और रामानंद मिश्रा समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। वहीं पारा विधिक स्वयंसेवकों में कविंद्र पाठक, मनन कुमार सिंह, शिवदयाल पांडे, प्रमोद कुमार, रामजी यादव, विवेक कुमार और प्रेम प्रकाश चौबे सहित अन्य लोगों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में न्यायालय कर्मियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की भी महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।





