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श्रीकृष्ण बाबू ने बिहार को आधुनिक राज्य की दिशा में बढ़ाया : अखिलेश प्रसाद सिंह

बक्सर में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में आयोजित होने वाले डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती समारोह के लिए दिया न्योता, बोले- उनके पदचिह्नों पर चलने की जरूरत

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
पूर्व केंद्रीय मंत्री, बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने बक्सर में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को आधुनिक बिहार का निर्माता और बिहार के विकास का शिल्पकार बताया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ बिहार के विकास की मजबूत नींव रखी। उनके कार्यकाल में बिहार में औद्योगिक विकास, शिक्षा, सिंचाई और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा मिली।

 

डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह बक्सर में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आगामी 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में आयोजित होने वाले समारोह का निमंत्रण देने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बक्सर जिले से बड़ी संख्या में श्रीबाबू के विचारों और उनके विकास मॉडल के समर्थक कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी बक्सरवासियों को समारोह में शामिल होने का न्योता देने आया हूं।

 

श्रीकृष्ण बाबू के कार्यकाल में बिहार ने विकास की नई ऊंचाइयां हासिल कीं

राज्यसभा सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू ने बिहार को आधुनिक बिहार की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने औद्योगिक विकास के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और राज्य में विकास की आधारभूत संरचना तैयार करने का काम किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह के शासनकाल में बिहार में कई बड़े औद्योगिक और विकासात्मक प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। बरौनी रिफाइनरी, बरौनी खाद कारखाना, सिंदरी खाद कारखाना, बोकारो स्टील प्लांट और कोसी परियोजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत उनके दौर में हुई। इसके साथ ही कई कॉलेजों और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण बाबू की प्रशासनिक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके शासनकाल को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ‘बेस्ट एडमिनिस्टर्ड स्टेट’ के रूप में सराहा था।

स्वतंत्रता आंदोलन में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह केवल विकास पुरुष ही नहीं, बल्कि सच्चे देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए और देश की आजादी की लड़ाई के दौरान आठ वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहे। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी श्रीकृष्ण बाबू ने सत्ता को व्यक्तिगत हित का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि बिहार के पुनर्निर्माण और विकास को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, जिसका व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ा।

आज उनके पदचिह्नों पर चलने की जरूरत

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह का जीवन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए संघर्ष किया और आजादी के बाद बिहार को विकास की राह पर आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता है कि श्रीकृष्ण बाबू के विचारों और उनके विकास के दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुंचाया जाए तथा उनके पदचिह्नों पर चलकर बिहार को आगे ले जाने का प्रयास किया जाए।

आयोजन समिति के सदस्यों ने भी दिया निमंत्रण

कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति के संयोजक प्रो. शशि भूषण पाण्डेय ने मंच संचालन किया। समारोह को लेकर बक्सर पहुंचे नेताओं एवं आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने भी लोगों को 25 अक्टूबर को पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया। इस दौरान पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी, करगहर विधायक संतोष मिश्र, राजपुर के पूर्व विधायक विश्वनाथ राम, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन पाण्डेय, सूरज सिन्हा एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में आयोजन समिति के सदस्य अमिताभ शरण, गगन मिश्र, डॉ. देविका मिश्र, विमल कुमार सिंह, निधि पांडेय, कामेश्वर पांडेय, प्रमोद ओझा, त्रिलोकीनाथ मिश्र, नीलू मिश्र, गोपाल शर्मा, शशांक दूबे, विभोर द्विवेदी, संतोष पाण्डेय, शुभम तिवारी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। आयोजकों ने बक्सर जिले के लोगों से बड़ी संख्या में पटना पहुंचकर डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती समारोह में शामिल होने की अपील की।

 

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