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न दिखावे की तारीफ, जमीनी काम का सम्मान : दशहरा में दिखा प्रशासनिक समन्वय, व्यवस्था रही काबिले-तारीफ

सप्तमी से दशहरा तक दिन की ड्यूटी के बाद देर रात तक सड़कों पर मुस्तैद रहे एसडीओ अविनाश कुमार व एसडीपीओ गौरव पांडेय, पूजा समितियों से लगातार समन्वय ने शांतिपूर्ण आयोजन में निभाई अहम भूमिका

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
न्यूज़ विज़न हमेशा से उन उपलब्धियों और कार्यों को प्रमुखता देता रहा है, जिनका असर जमीन पर दिखाई देता है। हमारा उद्देश्य किसी अधिकारी, जनप्रतिनिधि या संस्था की अनावश्यक प्रशंसा करना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े अच्छे कार्यों को सामने लाना और जहां व्यवस्था में कमी हो, वहां सवाल उठाना है। इसी निष्पक्ष दृष्टिकोण के तहत हर वर्ष की तरह इस बार भी दशहरा के दौरान शहर के विभिन्न पूजा पंडालों और प्रमुख स्थलों का भ्रमण कर जमीनी स्थिति को करीब से देखा गया।

 

इस वर्ष सप्तमी से लेकर विजयादशमी तक शहर में जिस तरह पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, उसे देखते हुए प्रशासन और पुलिस के सामने सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण तथा पूजा समितियों के साथ समन्वय बनाए रखने की बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती के बीच बक्सर अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी गौरव पांडेय की सक्रियता विशेष रूप से देखने को मिली। दिन में अपने प्रशासनिक एवं विभागीय दायित्वों का निर्वहन करने के बाद दोनों अधिकारी शाम से लेकर देर रात तक शहर की सड़कों और पूजा पंडालों के आसपास व्यवस्था का जायजा लेते नजर आए। विभिन्न पूजा समितियों से सीधे संवाद, आवश्यक निर्देश, भीड़ और यातायात की स्थिति पर निगरानी तथा स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान की कोशिश ने पर्व के दौरान व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में योगदान दिया।

 

यह कहना उचित होगा कि किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता केवल प्रशासन के प्रयास से संभव नहीं होती। इसमें पूजा समितियों, नगर निकाय, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस बार बक्सर नगर परिषद के प्रतिनिधि नियामतुल्ला फरीदी तथा रेडक्रॉस सचिव श्रवण तिवारी भी प्रशासन के साथ लगातार समन्वय करते हुए दिखाई दिए। विभिन्न स्तरों पर सहयोग और संवाद ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई। न्यूज़ विज़न यह स्पष्ट करना चाहता है कि यह किसी अधिकारी की चापलूसी या औपचारिक प्रशंसा नहीं है। पत्रकारिता का दायित्व उपलब्धियों के साथ कमियों को भी सामने रखना है। लेकिन जहां किसी व्यवस्था का सकारात्मक असर जनता और शहर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे, वहां उसका उल्लेख करना भी उतना ही जरूरी है।

इस बार दशहरा के दौरान प्रशासन, पुलिस, पूजा समितियों और सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच जिस स्तर का समन्वय देखने को मिला, वह निश्चित रूप से काबिले-तारीफ रहा। शांतिपूर्ण माहौल में पर्व का संपन्न होना इसी सामूहिक प्रयास का परिणाम माना जा सकता है।

 

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