‘सुरक्षित बचपन अभियान’: बच्चों को बताया- गलत स्पर्श पर डरें नहीं, आवाज उठाएं
सुरक्षित बचपन अभियान के तहत बिहार सेंट्रल स्कूल में पॉक्सो एक्ट पर विधिक जागरूकता शिविर, प्रधान दंडाधिकारी हर्षवर्धन सिंह ने विद्यार्थियों को बताए सुरक्षा और कानूनी अधिकार

न्यूज़ विज़न। बक्सर
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर द्वारा चलाए जा रहे ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ (26 से 31 अक्टूबर 2026) के तहत गुरुवार, 29 अक्टूबर को शहर के बाईपास रोड स्थित बिहार सेंट्रल स्कूल परिसर में बाल यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट), 2012 को लेकर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की ओर से सचिव सरोज सिंह द्वारा प्रधान दंडाधिकारी, किशोर न्याय परिषद, बक्सर हर्षवर्धन सिंह का अंगवस्त्र, मोमेंटो एवं विद्यालय का प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत करने के साथ हुई। शिविर को संबोधित करते हुए प्रधान दंडाधिकारी हर्षवर्धन सिंह ने विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए। किसी भी प्रकार के गलत व्यवहार या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देना बेहद जरूरी है।
गुड टच और बैड टच का अंतर समझना जरूरी
उन्होंने बच्चों को Good Touch (अच्छा स्पर्श) और Bad Touch (बुरा स्पर्श) के बीच का अंतर समझाते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ऐसा स्पर्श जिससे बच्चा सुरक्षित, प्यार और सहज महसूस करे, सामान्यतः अच्छा स्पर्श हो सकता है। जैसे माता-पिता द्वारा प्यार से गले लगाना, सिर पर हाथ फेरना, डॉक्टर द्वारा बीमारी की स्थिति में आवश्यक जांच करना या दोस्तों के बीच हाई-फाइव करना। वहीं, ऐसा स्पर्श जिससे बच्चा असहज, भयभीत, दर्द या बेचैनी महसूस करे, अथवा कोई व्यक्ति बच्चे के निजी अंगों को छूने की कोशिश करे, जबरदस्ती गले लगाए या किस करे अथवा किसी अनुचित बात को गुप्त रखने के लिए कहे, वह गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है।
बच्चों को बताए सुरक्षा के जरूरी नियम
शिविर में बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि उनका शरीर उनका अपना है और किसी को भी उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें छूने का अधिकार नहीं है। बच्चों को यह भी समझाया गया कि यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से छूने या डराने की कोशिश करता है तो वे डरें नहीं, स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ कहें और तत्काल वहां से सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। इसके साथ ही किसी भरोसेमंद व्यक्ति, जैसे माता-पिता, शिक्षक या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति को घटना की जानकारी दें। कार्यक्रम में बच्चों को यह संदेश भी दिया गया कि यौन उत्पीड़न या किसी गलत व्यवहार के लिए बच्चे स्वयं जिम्मेदार नहीं होते। इसलिए किसी भी घटना को छिपाने के बजाय तत्काल सहायता लेना जरूरी है।
आपात स्थिति में 1098 की जानकारी
शिविर में बच्चों एवं अभिभावकों को सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी आपात स्थिति में बच्चों की सहायता के लिए इस हेल्पलाइन का उपयोग किया जा सकता है।
अधिवक्ता एवं शिक्षक रहे मौजूद
कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव एवं पीएलवी ब्रजेश कुमार उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सुधीर कुमार, अशोक कुमार सिंह तथा कार्यालय परिचारी सुनील कुमार ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया। विद्यालय की ओर से उप-प्राचार्य विनय कुमार तिवारी सहित शिक्षक वरुण कुमार, सुनील कुमार, मो. चांद एवं मो. अतीक उपस्थित रहे। वहीं विद्यार्थियों में प्राप्ति पांडेय, राजलक्ष्मी, शीतल कुमारी, श्वेतांक पांडेय एवं अभिषेक सिंह ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर की ओर से विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। सुरक्षित बचपन अभियान के तहत आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें किसी भी संभावित खतरे की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर आवाज उठाने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।
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