सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की व्यवस्था पर उठे सवाल, 80+ बार रक्तदान करने वाले प्रियेश समेत सभी रक्दाता हुए नाराज
थैलेसीमिया मरीज के लिए डोनर लेकर पहुंचे थे प्रियेश, पानी तक की व्यवस्था नहीं होने का आरोप; डीएम, विधायक और परियोजना निदेशक को ईमेल से दी शिकायत


न्यूज़ विजन | बक्सर
जिले में रक्तदान के जरिए जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए लगातार सक्रिय रहने वाले रक्तदाता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रियेश ने सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुक्रवार को थैलेसीमिया पीड़ित मरीज के लिए रक्तदान कराने डोनर को लेकर पहुंचे प्रियेश को कथित तौर पर ब्लड बैंक कर्मियों की ओर से पानी तक की व्यवस्था स्वयं करने की बात कही गई। इस घटना से आहत प्रियेश ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और पूरे मामले की जानकारी जिले के वरीय अधिकारियों को ईमेल के माध्यम से दी।
80 से अधिक बार कर चुके हैं स्वयं रक्तदान
प्रियेश जिले में रक्तदान को लेकर लंबे समय से सक्रिय हैं। वे अब तक 80 यूनिट से अधिक बार स्वयं रक्तदान कर चुके हैं। रक्तदान के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सम्मानित किया जा चुका है। वे बक्सर में “ब्यूटीफुल लाइफ ओनली ऑन डोनेटिंग” संस्था का संचालन भी करते हैं, जिसके माध्यम से जरूरतमंद मरीजों के लिए लगातार रक्त उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। प्रियेश के अनुसार, उनकी संस्था से वर्तमान समय में 19 रक्त वीरांगनाओं समेत कुल 519 रक्तदाता जुड़े हुए हैं। संस्था की ओर से प्रत्येक माह दो बार रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है और इन शिविरों तथा व्यक्तिगत प्रयासों के माध्यम से हर महीने करीब 100 यूनिट से अधिक रक्तदान कराया जाता है।
थैलेसीमिया मरीज के लिए डोनर लेकर पहुंचे थे ब्लड बैंक
शुक्रवार को भी प्रियेश एक थैलेसीमिया मरीज की मदद के लिए रक्तदाता को लेकर सदर अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे थे। उनका उद्देश्य जरूरतमंद मरीज के लिए रक्तदान कराना था। इसी दौरान ब्लड बैंक में मौजूद कर्मियों से उन्हें पानी उपलब्ध कराने को लेकर कथित तौर पर कहा गया कि अगर पानी पीने की जरूरत है तो वे स्वयं अपना पानी खरीदकर लाएं। प्रियेश के मुताबिक, एक ओर रक्तदाता अपनी व्यस्तता के बावजूद मरीज की जिंदगी बचाने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि उन्हें छोटी-छोटी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़े तो इससे रक्तदाताओं का मनोबल प्रभावित होता है।
अधिकारियों से बात की, लेकिन एक-दूसरे के पास भेजे जाने का आरोप
मामले के बाद प्रियेश ने इसकी शिकायत सदर अस्पताल के वरीय अधिकारियों से करने का प्रयास किया। उन्होंने सबसे पहले सिविल सर्जन से बात की। प्रियेश के अनुसार, सिविल सर्जन ने उन्हें डीएस से बात करने को कहा। जब उन्होंने डीएस से संपर्क किया तो उन्हें अस्पताल प्रबंधक से बात करने की सलाह दी गई। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर प्रियेश ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति जरूरतमंद मरीज के लिए रक्तदान कराने अस्पताल पहुंचता है, तो उसकी समस्या को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और समाधान के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
तीन दिनों में 7 यूनिट रक्तदान कराने का दावा
प्रियेश ने बताया कि पिछले तीन दिनों में उनकी संस्था के माध्यम से कुल 7 यूनिट रक्तदान कराया गया है। ये रक्त अलग-अलग थैलेसीमिया मरीजों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था के रक्तदाता लगातार जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आते हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने वाले लोगों को यदि अस्पताल में सम्मानजनक और सहयोगात्मक वातावरण नहीं मिलेगा तो भविष्य में लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना मुश्किल हो सकता है।
519 रक्तदाताओं का नेटवर्क, हर माह दो बार कैंप
प्रियेश के मुताबिक उनकी संस्था से वर्तमान में 519 रक्तदाता जुड़े हुए हैं, जिनमें 19 महिलाएं रक्त वीरांगना के रूप में सक्रिय हैं। संस्था द्वारा प्रत्येक माह दो बार रक्तदान शिविर लगाया जाता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर डोनरों से संपर्क कर थैलेसीमिया और अन्य गंभीर मरीजों के लिए रक्तदान कराया जाता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने का माध्यम है। ऐसे में रक्तदाताओं के साथ बेहतर व्यवहार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
डीएम समेत वरीय अधिकारियों को भेजी शिकायत
ब्लड बैंक की व्यवस्था से नाराज प्रियेश ने पूरे मामले की जानकारी बक्सर जिलाधिकारी, बक्सर विधायक आनंद मिश्रा एवं परियोजना निदेशक को ईमेल के माध्यम से दी है। उन्होंने अधिकारियों से सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक की व्यवस्थाओं की गंभीरता से जांच कराने और आवश्यक सुधार व कार्रवाई करने की मांग की है। प्रियेश का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ब्लड बैंक की व्यवस्था को बेहतर बनाना है, ताकि रक्तदान करने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त मिल सके।
अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर नजर
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर है। सवाल यह है कि यदि रक्तदाता निस्वार्थ भाव से थैलेसीमिया और गंभीर मरीजों के लिए रक्तदान करने पहुंचते हैं, तो क्या ब्लड बैंक में उनके लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं और बेहतर व्यवहार सुनिश्चित नहीं किया जाना चाहिए? रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए सरकार और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से लगातार अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे में बक्सर सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की व्यवस्था को लेकर उठे इन सवालों पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीरता से संज्ञान लिया जाता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।





