बक्सर में सजा सतयुग का मनोहारी संसार, ब्रह्माकुमारीज़ भवन में अलौकिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
बाल गोपाल, राधा रानी और गोप-गोपियों के रूप में दिखी भारतीय संस्कृति की अनुपम झलक, आध्यात्मिक रहस्य से कराया गया श्रद्धालुओं को परिचित


न्यूज़ विज़न। बक्सर
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की ओर से बाबा नगर, डिफेंस कॉलोनी, बक्सर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ परमात्म अनुभूति भवन में शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर अलौकिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान पूरा परिसर भक्ति, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आया।
महोत्सव के दौरान बाल गोपाल, राधा रानी तथा गोप-गोपियों के रूप में सजे बच्चों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों और आकर्षक सजावट से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सतयुग का स्वर्णिम संसार धरती पर साकार हो उठा हो। ब्रह्माकुमारीज़ परमात्म अनुभूति भवन में मथुरा-वृंदावन की आध्यात्मिक छटा का अद्भुत अनुभव देखने को मिला। कार्यक्रम में संस्था की संचालिका आदरणीय ब्रह्माकुमारी रानी दीदी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण 16 कला संपूर्ण, सर्वगुण संपन्न और श्रेष्ठ से श्रेष्ठ व्यक्तित्व के प्रतीक हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उनके दिव्य गुणों और श्रेष्ठ जीवन की यादगार के रूप में मनाई जाती है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सतयुग की स्मृति का प्रतीक भी है। सतयुग ऐसी दुनिया का प्रतीक है, जहां सुख, शांति, समृद्धि और सद्भावना का वातावरण होता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की धरती पर फिर से स्वर्णिम युग का आगमन होगा और मानव जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा। महोत्सव के दौरान आध्यात्मिक संदेश के साथ बच्चों की मनमोहक वेशभूषा ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। बाल गोपाल के रूप में सजे नन्हे बच्चों की मासूमियत, राधा रानी की मनोहारी छवि तथा गोप-गोपियों के रूप में बच्चों की प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
आयोजन के दौरान ऐसा अलौकिक वातावरण निर्मित हुआ कि मानो बक्सर धाम में ही मथुरा-वृंदावन की झलक साकार हो गई हो। श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक आनंद, संस्कार और भारतीय संस्कृति से जुड़ने का सुंदर अवसर बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनके दिव्य गुणों से प्रेरणा लेकर मानव जीवन में पवित्रता, शांति, प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देना रहा। महोत्सव ने उपस्थित लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों के साथ स्वर्णिम एवं सुखमय समाज की परिकल्पना से भी जोड़ा।





