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नाबालिग बच्चियों के शोषण में आरोपित प्रिंसिपल को राजकीय शिक्षक सम्मान हेतु अनुशंसा करने वाले अधिकारियों की भी हो विभागीय जांच: डॉ. स्नेहाशीष वर्धन

पोस्को एक्ट में आरोपित दूसरे शिक्षक की अविलंब गिरफ्तारी व सभी आरोपियों की सेवा बर्खास्तगी करें राज्य सरकार: डॉ. स्नेहाशीष वर्धन

न्यूज़ विज़न।  बक्सर /पटना 
डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहिर के डेरा मध्य विद्यालय में नाबालिग बच्चियों के लंबे समय से हो रहे शोषण में पॉस्को एक्ट के तहत आरोपी प्रिसिंपल को शिक्षक दिवस पर मिलने वाले राजकीय शिक्षक सम्मान 2026 हेतु चयन होना राज्य की एनडीए सरकार के कार्यकलाप पर काला धब्बा है। यह बताता है कि एनडीए सरकार में महिलाओं, बच्चियों के सम्मान और अस्मिता के प्रति वर्तमान सरकार और उसके अधिकारियों में कोई जवाबदेही नहीं है। तत्कालीन व वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी, चयन  प्रक्रिया में शामिल तमाम अधिकारियों और बीईओ पर भी जांच होनी चाहिए कि आखिर ऐसे प्रधानाध्यापक का चयन किसके अनुशंसा पर किया गया जो कई महीनों से नाबालिग बच्चियों के साथ हो रहे दुष्कर्म में पॉस्को एक्ट के तहत दोषी है? आरोपित दोनों शिक्षकों में से केवल की गिरफ्तारी अब तक हो सकी है। ये बातें बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कही है।

 

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि एनडीए शासन काल में अधिकारियों की अकर्मण्यता जगजाहिर है। बक्सर लोकसभा से चुनाव लड़ चुके और वर्तमान में राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी हैं बावजूद इसके ऐसे घृणित कार्य के आरोपी का चयन बक्सर जिले से हो जाता है और फिर आनन फानन में आदेश जारी कर चयन को निरस्त किया जाता है। आश्चर्यजनक रूप से आरोपित शिक्षकों में से एक शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद के खिलाफ पहले से 2023 के विभागीय जांच में टीचर ट्रेनिंग सर्टिफिकेट में फर्जीवाड़ा पाया गया था,  बावजूद इसके शिक्षा विभाग ने उसकी बर्खास्तगी क्यों नहीं की? साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के द्वारा उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक मु. इमाम अली अंसारी जो इस मामले में पीड़िता के मां के कृष्णाब्रह्म थाना में शिकायत के आधार पर पोस्को एक्ट के तहत आरोपित हैं उनको राजकीय शिक्षक सम्मान 2026 के लिए चयन करने वाले अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए कि वें किस मानक के आधार पर उक्त प्रधानाध्यापक का चयन किये थे?

 

इस मामले में तत्कालीन व वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी, चयन समिति के सदस्य और बीईओ पर भी शिक्षा विभाग के द्वारा जांच करनी चाहिए कि वैसे विद्यालय के प्रिंसिपल के चयन में किसी व्यक्तिगत लाभ के आधार पर तो चयन नहीं हुआ था और चयन में इनकी भूमिका क्या रही थी? साथ ही सरकार से उन्होंने मुख्य आरोपी शिक्षक अरविंद कुमार की गिरफ्तारी के बाद दूसरे आरोपी शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद की अविलंब गिरफ्तारी करने और शिक्षा विभाग से आरोपितों की सेवा बर्खास्तगी की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़िताओं और उनके परिजनों की फरार आरोपी से सुरक्षा सुनिश्चित करें और वायरल वीडियो को अविलंब फैलने से रोकने की कवायद करें।

वीडियो देखें :

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