फरक्का जल संधि पर बिहार के हक की हुंकार, बक्सर से जदयू शुरू करेगा ‘नीतीश संवाद’
5 सितंबर को बक्सर में जुटेंगे जदयू के नेता-कार्यकर्ता, गंगा के जल अधिकार, गाद, सिंचाई और बाढ़ के मुद्दे पर होगा जनसंवाद; पांच हजार से अधिक लोगों के पहुंचने का दावा


न्यूज़ विज़न। बक्सर
फरक्का जल संधि की शर्तों में बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से शनिवार, 5 सितंबर को बक्सर में ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। चरित्रवन स्थित सुमेश्वर स्थान मोहल्ले में वामन मंदिर के समीप बगीचा उत्सव लॉन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। शुक्रवार को जदयू के कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान मंच, बैठने की व्यवस्था, बारिश से बचाव तथा कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई।
जदयू नेताओं का कहना है कि फरक्का जल संधि का मुद्दा केवल गंगा के पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बिहार की सिंचाई, कृषि, जल उपलब्धता और बाढ़ की समस्या से है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर गंगा किनारे बसे बिहार के जिलों में जनसंवाद अभियान चलाने की तैयारी में है और बक्सर से इसकी महत्वपूर्ण शुरुआत की जा रही है।
गंगा बिहार में प्रवेश करती है, इसलिए बक्सर से उठेगा बड़ा सवाल : राहुल सिंह
डुमरांव विधायक राहुल सिंह ने कहा कि बक्सर बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण जिला है, जहां से गंगा बिहार में प्रवेश करती है और इसके बाद राज्य के कई जिलों से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल की ओर जाती है। उन्होंने कहा कि गंगा में लगातार गाद जमा होने के कारण नदी की स्थिति प्रभावित हो रही है। गर्मी के मौसम में पानी की कमी और मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या बिहार के सामने लगातार बनी रहती है। उन्होंने कहा कि गर्मी में तिनोहानी के पास गंगा की धार काफी पतली दिखाई देती है, जबकि बरसात के दिनों में यही नदी विकराल रूप लेकर बाढ़ की स्थिति पैदा कर देती है। बिहार को इस दोहरी समस्या से निजात दिलाने के लिए इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जा रहा है।
30 साल पूरे होने से पहले जदयू ने तेज की मुहिम
जदयू प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने कहा कि 12 दिसंबर 2026 को भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के 30 वर्ष पूरे होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि तीन दशक पहले हुए फैसले में बिहार के हितों को अपेक्षित महत्व नहीं मिला था। अब जब संधि की अवधि के तीन दशक पूरे होने जा रहे हैं, तब बिहार के हितों को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद की समस्या बढ़ने का दावा करते हुए कहा कि इसका असर गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता और बरसात के दौरान बाढ़ की स्थिति पर पड़ता है। इससे किसानों और सिंचाई व्यवस्था को भी परेशानी होती है। अंजुम आरा ने बताया कि जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा इस मुद्दे को संसद में मजबूती से उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जनता से संवाद किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और बिहार के जल अधिकार से जुड़े सवाल को मजबूती से सामने रखना है।
हजारों कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा
राजपुर विधायक संतोष निराला ने कहा कि कार्यक्रम की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और पार्टी के कार्यकर्ता पूरी तरह जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद पहली बार जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष इस कार्यक्रम में शामिल होने बक्सर पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। जदयू जिलाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया कि गांव-गांव से लोग कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल रहे हैं। उन्होंने पांच हजार से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। नेताओं के पटना से सड़क मार्ग के जरिए बक्सर पहुंचने की बात भी उन्होंने कही, ताकि रास्ते में आम लोगों से मुलाकात और संवाद किया जा सके। कार्यक्रम स्थल पर लगभग पांच हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। भीड़ बढ़ने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी गई है। बारिश की संभावना को देखते हुए वाटरप्रूफ टेंट की व्यवस्था की गई है।
ऐतिहासिक धरती से होगा अभियान का आगाज
जदयू नेता मंटू उपाध्याय ने कार्यक्रम स्थल के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भगवान वामन की जन्मस्थली से जुड़ी भूमि है और यहां भगवान वामन का मंदिर भी स्थित है। उन्होंने इसे महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि तथा भगवान श्रीराम की कर्मभूमि से जुड़ी ऐतिहासिक धरती बताया। उन्होंने कहा कि संजय कुमार झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के बक्सर पहुंचने पर प्रवेश मार्ग से लेकर सभा स्थल तक हजारों कार्यकर्ताओं द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरती पर नेताओं का स्वागत भी ऐतिहासिक होगा।
फरक्का संधि की शर्तों पर भी होगी चर्चा
जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने फरक्का जल संधि के तहत पानी के बंटवारे से जुड़ी शर्तों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व की व्यवस्था के अनुसार 70 हजार क्यूसेक या उससे कम पानी होने पर बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक पानी देने का प्रावधान था। 70 हजार से 75 हजार क्यूसेक के बीच पानी होने पर निर्धारित हिस्सेदारी के आधार पर पानी का बंटवारा किया जाता था, जबकि 75 हजार क्यूसेक से अधिक पानी होने पर तय हिस्सा भारत के पास रखने के बाद शेष पानी देने की व्यवस्था थी। उन्होंने कहा कि 1975 में फरक्का बैराज के निर्माण के बाद गंगा में बड़ी मात्रा में गाद जमा होने की समस्या सामने आई। इसके कारण बिहार को गर्मी में पानी की कमी और मानसून में बाढ़ जैसी विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
30 साल बाद फिर उठेगा बिहार के हिस्से का सवाल
भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के 30 वर्ष पूरे होने से पहले जदयू ने इस मुद्दे को बिहार के जल अधिकार, सिंचाई, कृषि और बाढ़ की समस्या से जोड़ते हुए जनसंवाद अभियान शुरू किया है। 5 सितंबर को बक्सर से होने वाला ‘नीतीश संवाद’ इसी अभियान की अहम कड़ी माना जा रहा है। शुक्रवार को कार्यक्रम स्थल के निरीक्षण के दौरान जदयू नेताओं ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। अब सबकी नजर शनिवार को बक्सर में होने वाले इस कार्यक्रम पर है, जहां फरक्का जल संधि के साथ बिहार के जल अधिकार और गंगा से जुड़ी समस्याओं को लेकर पार्टी अपना पक्ष जनता के बीच मजबूती से रखने की तैयारी में है।
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