छठ से पहले बदहाल पड़ा नदांव का पौराणिक नारद सरोवर, व्रतियों की राह में गड्ढे और घाटों पर पसरी गंदगी
सरोवर में पानी न के बराबर, घाटों की सफाई और रोशनी का भी अभाव; आधा दर्जन से अधिक गांवों के हजारों श्रद्धालु करते हैं यहां अर्घ्य अर्पित, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अविलंब व्यवस्था दुरुस्त कराने की उठाई मांग

न्यूज़ विज़न। बक्सर
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर जिलेभर में तैयारियां जोरों पर हैं। व्रती और श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के लिए घाटों की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में जुटे हैं। वहीं, बक्सर के नदांव स्थित पौराणिक नारद सरोवर की बदहाल स्थिति ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। छठ महापर्व से ठीक पहले सरोवर तक पहुंचने वाले रास्तों की जर्जर हालत, घाटों पर फैली गंदगी और सरोवर में पानी की कमी के कारण इस बार व्रतियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
नारद सरोवर तक पहुंचने वाले मुख्य रास्तों और संपर्क मार्गों की स्थिति बेहद खराब है। सड़कों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। वहीं, कई स्थानों पर गंदगी और कीचड़ पसरा हुआ है। ऐसे में छठ व्रत करने वाली महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए सरोवर तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। खासकर उन व्रतियों को अधिक परेशानी हो सकती है, जो छठ की कठिन साधना के तहत नंगे पैर घाट तक पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रास्तों की मरम्मत नहीं कराई गई तो अर्घ्य देने आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में भारी कठिनाई होगी।
सरोवर में पानी की कमी और परिसर में पसरी गंदगी बनी चिंता का विषय
स्थानीय निवासी मंटू कुमार उर्फ बबुआ जी ने सरोवर की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि पौराणिक नारद सरोवर में फिलहाल पानी न के बराबर बचा है। सरोवर के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्थिति यह है कि सरोवर की जमीन और आसपास के परिसर का इस्तेमाल कुछ लोगों द्वारा उपला (गोइठा) थापने के लिए किया जा रहा है। इससे सरोवर परिसर की स्थिति और भी खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि छठ जैसे महत्वपूर्ण लोक आस्था के पर्व पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए व्रतियों और उनके परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
आधा दर्जन से अधिक गांवों के हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं अर्घ्य देने
नारद सरोवर की धार्मिक और स्थानीय महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां केवल नदांव गांव के लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु भी छठ पूजा करने पहुंचते हैं। जगदीशपुर, कुल्हाड़ियां, पंडितपुर, मनोहरचक समेत आधा दर्जन से अधिक गांवों के हजारों व्रती और श्रद्धालु इस पौराणिक सरोवर पर भगवान सूर्य को सांध्यकालीन और प्रातःकालीन अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे में सरोवर की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं का अभाव छठ पूजा के दौरान बड़ी समस्या बन सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग
सरोवर की बदहाल स्थिति को देखते हुए स्थानीय पृथ्वीनाथ सिंह, मनीष यादव, रूपाजी, पिंकी चौहान, अंकित सिंह, अभय दूबे समेत अन्य लोगों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से छठ महापर्व से पहले आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों ने प्रमुख रूप से सरोवर में पर्याप्त पानी की व्यवस्था कराने और पूरे परिसर की मुकम्मल सफाई कराने की मांग उठाई है। इसके साथ ही घाटों की सफाई, सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग तथा रात के समय पर्याप्त रोशनी के लिए सरोवर के चारों कोनों पर हाईमास्ट लाइट लगाने की जरूरत बताई है।
महिला व्रतियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चेंजिंग रूम की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी शौचालय और यूरिनल का निर्माण कराने की भी मांग की गई है। वहीं, सरोवर तक पहुंचने वाले मुख्य और संपर्क मार्गों की अविलंब मरम्मत कराने पर भी जोर दिया गया है, ताकि नंगे पैर आने वाले व्रतियों और अन्य श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छठ महापर्व आस्था, स्वच्छता और पवित्रता का प्रतीक है। ऐसे में पौराणिक नारद सरोवर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है। प्रशासन को चाहिए कि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से पहले सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कराए जाएं, ताकि व्रती स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सकें।




