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एमवी कॉलेज बक्सर में राष्ट्रीय सेमिनार का समापन, ‘विकसित भारत 2047’ और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर शोधार्थियों ने रखे महत्वपूर्ण विचार

आईसीएसएसआर प्रायोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन राजनीतिक विज्ञान के शोधार्थियों ने शिक्षा, लोकतंत्र, चुनाव सुधार और विदेश नीति पर प्रस्तुत किए शोधपत्र, उत्कृष्ट प्रस्तुति पर किया गया सम्मानित

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
महाराजा विश्वामित्र (एमवी) कॉलेज, बक्सर में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का दूसरे दिन सफलतापूर्वक समापन हुआ। सेमिनार का मुख्य विषय “विकसित भारत 2047 के लिए भारत की निर्वाचन प्रणाली का पुनर्निर्माण : एक राष्ट्र, एक चुनाव एवं डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की ओर” रहा। कार्यक्रम में वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के राजनीतिक विज्ञान विभाग के शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत करते हुए विकसित भारत के निर्माण, चुनावी सुधार, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार रखे।

 

राजनीतिक विज्ञान विभाग के शोधार्थी अविनाश कुमार वर्मा ने अपने शोधपत्र में कहा कि विकसित भारत 2047 का अर्थ केवल आर्थिक रूप से समृद्ध राष्ट्र नहीं है, बल्कि ऐसा भारत है जहाँ प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, सम्मानजनक रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे मजबूत आधारशिला होती है और युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए। नागरिकों को ईमानदारी, अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्रभक्ति के साथ अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री के मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” को विकसित भारत के निर्माण का मूल आधार बताया।

 

वहीं शोधार्थी विशाल कुमार चौधरी ने अपने शोधपत्र में “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ चुनावी प्रक्रिया शासन और विकास की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने से शासन में स्थिरता आएगी, प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, चुनावी खर्च में कमी होगी तथा विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी। उन्होंने अपने शोधपत्र में राजनीतिक स्थिरता और भारत की विदेश नीति के संबंध का तुलनात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, यूपीए सरकार (2004–2014) ने बहुपक्षवाद, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर विशेष बल दिया, जबकि एनडीए सरकार (2014–वर्तमान) ने पड़ोसी प्रथम, एक्ट ईस्ट नीति, वैश्विक नेतृत्व, रक्षा कूटनीति, डिजिटल कूटनीति और रणनीतिक स्वायत्तता को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहे, लेकिन उनकी कार्यशैली और कूटनीतिक प्राथमिकताओं में स्पष्ट अंतर देखने को मिला।

सेमिनार में शोधार्थी दीपक कुमार यादव और शुभम कुमार ने भी विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्ण कांत सिंह ने सभी शोधार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें मोमेंटो एवं शॉल देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सेमिनार विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समसामयिक विषयों पर गंभीर अध्ययन एवं शोध के लिए प्रेरित करते हैं।

इस अवसर पर राजनीतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरविन्द कुमार वर्मा, प्रो. प्रिय रंजन चौबे, प्रो. आलोक कुमार चतुर्वेदी, प्रो. निशांत कुमार सहित वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय एवं विभिन्न महाविद्यालयों के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण, लोकतांत्रिक सशक्तिकरण और विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ हुआ।

 

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