40 किमी पैदल चलकर डीएम से मिलने पहुंचे छात्र, बक्सर में राजकीय कल्याण छात्रावास रामपुर की बदहाली के खिलाफ सड़क पर उतरे बच्चे
भोजन, पानी, बिजली और पढ़ाई की व्यवस्था पर उठाए सवाल; अंबेडकर चौक पर सड़क जाम कर डीएम को मौके पर बुलाने की मांग, प्रशासन ने समझाकर कलेक्ट्रेट में बैठाया


न्यूज़ विज़न। बक्सर
कंधे पर किताबें, आंखों में बेहतर भविष्य का सपना और व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल। रविवार को बक्सर में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब केसठ प्रखंड के रामपुर स्थित राजकीय कल्याण छात्रावास में रहने वाले तीसरी-चौथी कक्षा से लेकर दसवीं तक के करीब दर्जनों छात्र अपनी समस्याओं को लेकर लगभग 40 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय पहुंच गए। छात्रों का कहना था कि छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है और कई बार शिकायत के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद छात्रों ने अंबेडकर चौक के पास मुख्य सड़क पर बैठकर जाम कर दिया और जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। बच्चों का कहना था कि वे अपनी समस्याएं सीधे डीएम के सामने रखना चाहते हैं। छात्रों के आंदोलन की सूचना मिलते ही एसडीएम अविनाश कुमार और एसडीपीओ गौरव पांडेय उन्हें रोकने और उनकी समस्याएं सुनने के लिए 11 नंबर लख की ओर पहुंचे, लेकिन छात्र वहां नहीं रुके और अंबेडकर चौक पहुंच गए।
भोजन में कीड़े मिलने का आरोप, सात दिनों से पानी नहीं आने की शिकायत
छात्रों ने छात्रावास में भोजन, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर शिकायतें कीं। उनका आरोप है कि भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है और खाने में कीड़े मिलने की शिकायत भी सामने आई है। कई दिनों से बिजली की समस्या बनी रहने और पेयजल की व्यवस्था प्रभावित होने की बात भी छात्रों ने कही। छठी कक्षा के छात्र कवि कुमार ने बताया कि करीब सात दिनों से पानी नहीं आ रहा है और बिजली की समस्या भी बनी हुई है। छात्र का आरोप है कि पढ़ाई के लिए शिक्षक आते हैं, लेकिन केवल हाजिरी बनाकर चले जाते हैं। छात्रों का कहना है कि घर से दूर रहकर वे बेहतर शिक्षा और भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन छात्रावास में पढ़ाई के लिए जरूरी माहौल नहीं मिल पा रहा है।
मैट्रिक की परीक्षा सिर पर, अब तक पूरा नहीं हुआ पाठ्यक्रम
छात्रों का नेतृत्व कर रहे विशाल कुमार ने पढ़ाई को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष मैट्रिक की परीक्षा होनी है, लेकिन अभी तक पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अक्टूबर का महीना आ गया है और पढ़ाई अधूरी है, तो छात्र 90 प्रतिशत अंक कैसे प्राप्त करेंगे। विशाल कुमार ने भोजन में कीड़े मिलने, ड्रेस समेत अन्य जरूरी सुविधाओं में परेशानी और बिजली की समस्या का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि जनरेटर चलने के बावजूद पूरे छात्रावास में पर्याप्त बिजली की सुविधा नहीं मिल पाती है।
मार्च में भी हुआ था विरोध, छात्रों ने एफआईआर और नाम काटे जाने का लगाया आरोप
छात्रों ने दावा किया कि छात्रावास की समस्याओं को लेकर बीते मार्च में भी कुछ छात्रों ने विरोध किया था। छात्रों के अनुसार, उस दौरान उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और कुछ छात्रों के नाम भी काट दिए गए। आंदोलन कर रहे छात्रों ने कहा कि इसके बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका। छात्र नेता अनिल प्रधान ने आरोप लगाया कि भोजन, ड्रेस, पानी और बिजली समेत कई समस्याओं को लेकर जिला कल्याण पदाधिकारी से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी वजह से बच्चों को लेकर जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च करना पड़ा।
प्रशासन ने छात्रों की शिकायतें सुनीं, कलेक्ट्रेट परिसर में बैठाया
सड़क जाम की सूचना के बाद एसडीएम अविनाश कुमार और एसडीपीओ गौरव पांडेय मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाने और उनकी समस्याएं सुनने का प्रयास किया। एसडीएम ने छात्रों से लिखित शिकायत देने को कहा। बाद में प्रशासन ने छात्रों को समझाकर कलेक्ट्रेट परिसर में बैठाया गया। हालांकि छात्र इस बात पर अड़े रहे कि वे जिलाधिकारी से मिलकर ही वापस लौटेंगे। बावजूद संध्या 6 बजे तक डीएम मिलने नहीं पहुंची। छात्रों का कहना था कि उनकी शिकायतों का समाधान तभी संभव है, जब जिले के शीर्ष अधिकारी उनकी समस्याओं को सीधे सुनें।
जिला कल्याण पदाधिकारी ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, जिला कल्याण पदाधिकारी अरविंद कुमार ने छात्रों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनके खिलाफ माइंड वॉश कर भड़काया जा रहा है। उन्होंने भोजन को लेकर कहा कि शनिवार को छात्रावास में मटन-चावल बनाया गया था। बिजली और पानी की समस्या पर उन्होंने बताया कि बिजली की समस्या के कारण पिछले तीन दिनों से जनरेटर चलाकर पानी की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि आगे भी छात्रों की ओर से जो शिकायतें मिलेंगी, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
एसटी आयोग के सदस्य ने बच्चों के लिए पानी, बिस्कुट और केला उपलब्ध कराया
आंदोलन की जानकारी मिलने पर एसटी आयोग के सदस्य राजू खरवार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले बच्चों के लिए पानी, बिस्कुट और केले की व्यवस्था कराई। उन्होंने कहा कि बच्चों को समझा-बुझाकर शांत कराया गया है। राजू खरवार ने कहा कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी और मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिकायतें सुनकर समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
सवाल छात्रावास की सुविधाओं से आगे, बच्चों के भविष्य का
पूरे घटनाक्रम ने छात्रावास की व्यवस्था और बच्चों की शिकायतों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों के आरोप सही हैं या उन्हें किसी के द्वारा भड़काया गया है, यह जांच का विषय है। दूसरी ओर प्रशासन और जिला कल्याण पदाधिकारी की ओर से आरोपों पर अलग पक्ष सामने आया है। लेकिन इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर छात्रावास में रहने वाले बच्चों को अपनी समस्याएं बताने के लिए करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय तक आना पड़े, तो उनकी शिकायतें छात्रावास और प्रखंड स्तर पर कितनी सुनी जा रही थीं?
बच्चे पढ़ाई, भोजन, पानी, बिजली और बेहतर भविष्य की मांग को लेकर सड़क पर पहुंचे हैं। अब जरूरत इस बात की है कि छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों और विभाग की ओर से दिए गए जवाब—दोनों की निष्पक्ष जांच हो और जो भी समस्या वास्तविक है, उसका स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और छात्रावास वास्तव में उनके बेहतर भविष्य का आधार बन सके।





